सिंधु जल संधि (IWT) पर भारत के कड़ी रुख से घबराया पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय मंचों की शरण में पहुंच गया है। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) और संयुक्त राष्ट्र महासभा के समक्ष भारत के फैसले का मुद्दा उठाते हुए संधि को ‘पूरी तरह लागू’ कराने की मांग की है।
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि असीम इफ्तिखार अहमद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी दी कि उन्होंने पाकिस्तान के उप‑प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री की तरफ से लिखा गया पत्र यूएन जनरल असेंबली के अध्यक्ष को सौंपा है। इस पत्र में भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने को ‘क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा’ बताया गया है।
पत्र में कहा गया है कि भारत का फैसला पाकिस्तान में मानवीय संकट पैदा कर सकता है। साथ ही, भारत पर ‘प्रचार अभियान’ चलाने का आरोप लगाते हुए कश्मीर मुद्दे को भी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 1960 की सिंधु जल संधि तीन युद्धों, कारगिल संघर्ष, संसद हमला, 26/11, उरी और पुलवामा जैसे बड़े आतंकी हमलों के बावजूद बनी रही, लेकिन पिछले 65 साल में पहली बार भारत ने इसे अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है। इससे पाकिस्तान पर यह स्पष्ट संदेश गया है कि सीमा‑पार आतंकवाद की कीमत अब उसकी राष्ट्रीय जल जीवनरेखा से जुड़ सकती है।
भारत ने 23 अप्रैल 2025 को सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) के क्रियान्वयन को अस्थायी रूप से सस्पेंड करने का फैसला किया था। यह कदम पहलगाम आतंकी हमले के ठीक बाद उठाया गया, जिसमें 26 सामान्य नागरिकों की जान गई थी। यह आतंकी हमला पाकिस्तान से आए आतंकियों ने किया था।
भारत ने कहा कि खून और पानी एक साथ नहीं बर सकते। सरकार का कहना है कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को विश्वसनीय एवं स्थायी रूप से समाप्त नहीं करता, तब तक 1960 की संधि को उसी पुराने ढर्रे पर चलाना भारत के राष्ट्रीय हित और नागरिकों की सुरक्षा के खिलाफ है।
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