भारतीय रेलवे ने ‘आदर्श ट्रेन प्रोफाइल’ की शुरुआत की है ताकि प्रत्येक ट्रेन में मांग के उतार-चढ़ाव का नियमित रूप से विश्लेषण करके आरक्षित मेल एक्सप्रेस ट्रेनों में क्षमता उपयोग और आय सृजन को अधिकतम किया जा सके। रेलवे की इन-हाउस सॉफ्टवेयर शाखा सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम (CRIS) की तरफ से विकसित किया गया यह मॉड्यूल वेटिंग लिस्ट (Ticket Waiting List) को 5 से 6 फीसदी तक कम करने में सक्षम है।
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आर्दश ट्रेन प्रोफाइल एक सीट क्षमता के अनुकूलन निर्णय सहायता है। इसे इसलिए किया जा रहा है क्योंकि किसी एक तारीख की ट्रेन यात्रा में ही टिकट और श्रेणी के 5,000 से अधिक संयोजन हो सकते हैं। रेल मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार, टिकट के लिए मांग का उतार-चढ़ाव मात्र पहले से आखिरी स्टेशन के आधार पर नहीं होता है। बल्कि यह बीच के स्टेशनों, समय, श्रैणी और वैकल्पिक ट्रेनों एवं परिवहन साधनों की उपलब्धता के आधार पर अलग-अलग होता है।
इस मॉड्यूल का सफलतापूर्वक परीक्षण पूरा होने से रेलवे अधिकारियों को उम्मीद है कि इसकी मदद से जहां यात्रियों को ज्यादा कंफर्म टिकट उपलब्ध कराए जा सकेंगे, वहीं लंबी दूरी की ट्रेनों की आय एक साल में 1 करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है। बता दें भारत में हर साल लाखों लोग रेल से यात्रा करते हैं। लेकिन, यात्रियों की ज्यादा संख्या होने के कारण हर यात्री को कंफर्म टिकट नहीं मिल पाता।
यह पायलट परियोजना सात जोनल रेलवे – पूर्वी, मध्य, उत्तरी, दक्षिणी, दक्षिण मध्य, पश्चिमी और पश्चिम मध्य रेलवे पर शुरू की गई थी। पायलट प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे में अब तक 200 से अधिक ट्रेनों में आजमाई जा चुकी है। यह उम्मीद है कि इस सुविधा से कन्फर्म सीट की उपलब्धता बढ़ाने और ट्रेन में यात्रियों की संख्या को 5 प्रतिशत तक बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। इस मॉड्यूल को रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र के आर गोपालकृष्णन के नेतृत्व में रेलवे टीम द्वारा दो साल के कड़े प्रयासों के बाद विकसित किया गया है।
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