भारत में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल रिफाइनरियों को 2030 तक 137,000 (1.37 लाख) टन प्रति वर्ष (टीपीए) की हरित हाइड्रोजन क्षमता का निर्माण करने का अनुमान है। यदि फलीभूत होता है, तो निवेश और नौकरियों के साथ अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के अलावा, ग्रीन हाइड्रोजन सेक्टर में यह विशाल क्षमता निर्माण बड़े पैमाने पर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करेगा।
Buy Prime Test Series for all Banking, SSC, Insurance & other exams
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अनुसंधान एवं विकास के निदेशक डॉ. एस एस वी रामकुमार ने बेंगलुरु में इंडिया एनर्जी वीक में बोलते हुए उपरोक्त जानकारी का खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि इंडियन ऑयल सबसे पहले अपनी पानीपत रिफाइनरी में सात हजार टीपीए इलेक्ट्रोलिसिस प्लांट लगाएगी। डॉ. रामकुमार ने कहा कि बायोमास गैसीकरण भारत में हरित हाइड्रोजन के उत्पादन का एक बेहतर तरीका है।
विश्लेषकों का मानना है कि ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया में संक्रमण उत्सर्जन में कमी लाने और भारत को ईंधन के प्रमुख आयातक की वर्तमान स्थिति से ईंधन का शुद्ध निर्यातक बनाने के लिए प्रमुख आवश्यकताओं में से एक है।
भारतीय रुपया 20 मार्च 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इतिहास के सबसे निचले स्तर…
अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ जंग छेड़ दी है। कई दिन बीतने के…
Hindu Nav Varsh 2026: हिंदू पंचांग के मुताबिक नया साल यानी विक्रम संवत 2083, 19…
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India) द्वारा उत्तर प्रदेश के कालिंजर किला (Kalinjar Fort)…
अंतरराष्ट्रीय खुशहाली दिवस हर वर्ष 20 मार्च को विश्वभर में मनाया जाता है। यह दिन…
भूमिका श्रेष्ठा (Bhumika Shrestha) 37 वर्षीय सामाजिक कार्यकर्ता, 16 मार्च 2026 को नेपाल की पहली…