भारतीय नौसेना सिंगापुर में आयोजित सिंगापुर-भारत समुद्री द्विपक्षीय अभ्यास (SIMBEX) के 32वें संस्करण में भाग ले रही है, जो सिंगापुर की नौसेना (RSN) के साथ समुद्री सहयोग की दीर्घकालिक परंपरा को आगे बढ़ाता है। यह अभ्यास भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” और “सागर विज़न” के अंतर्गत दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ते नौसैनिक जुड़ाव का प्रतीक है, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा और कूटनीति के समन्वय को दर्शाता है।
पृष्ठभूमि
SIMBEX की शुरुआत 1994 में हुई थी और यह भारत का सबसे लंबे समय तक चलने वाला निर्बाध नौसैनिक द्विपक्षीय अभ्यास है। पहले इसे “एक्सरसाइज़ लायन किंग” कहा जाता था, जो समय के साथ एक जटिल और उच्च-मूल्य वाले समुद्री समन्वय अभ्यास में विकसित हो गया है। यह साझेदारी संचालन सहयोग, तकनीकी आदान-प्रदान, समुद्री क्षेत्र जागरूकता और क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देती है। यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थायित्व और सुरक्षित समुद्री परिवेश सुनिश्चित करने के लिए दशकों से चले आ रहे संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
महत्व
SIMBEX भारत की नौसैनिक क्षमताओं को प्रदर्शित करने, आपसी विश्वास को बढ़ाने और समन्वय को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। इस वर्ष अभ्यास को विशेष महत्व इसलिए भी प्राप्त है क्योंकि भारत और सिंगापुर अपने राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। यह साझा समुद्री हितों को मजबूती देता है, विशेष रूप से क्षेत्रीय तनाव, समुद्री लुटेरों के खतरे और नौवहन की स्वतंत्रता से जुड़ी चुनौतियों के बीच। इस अभ्यास के माध्यम से भारतीय नौसेना की विस्तारित तैनाती क्षेत्र में “नेट सुरक्षा प्रदाता” के रूप में भारत की भूमिका को भी पुष्ट करती है।
उद्देश्य
भारत और सिंगापुर की नौसेनाओं के बीच समन्वय और इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाना
समुद्री सुरक्षा और सुरक्षित समुद्री मार्गों को सुनिश्चित करना
भारत की एक्ट ईस्ट नीति और सागर (SAGAR) दृष्टिकोण को समर्थन देना
समुद्री खतरों और आपदा राहत (HADR) पर संयुक्त प्रतिक्रिया क्षमताओं का विकास करना
प्रमुख विशेषताएं
प्रभाव और भविष्य की योजनाएं
यह अभ्यास भारत की ब्लू-वॉटर ऑपरेशनों की तत्परता और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह सहकारी सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देता है, जो गैर-राज्य तत्वों, समुद्री लुटेरों और शांतिपूर्ण समुद्री नौवहन सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
साथ ही, भारत आगामी वर्ष 2026 की शुरुआत में विशाखापत्तनम में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू, बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास मिलन (MILAN) और IONS कॉन्क्लेव ऑफ चीफ्स जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री आयोजनों की मेजबानी करेगा, जो भारत की कूटनीतिक और परिचालनात्मक समुद्री नेतृत्व को और सुदृढ़ करेंगे।
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