भारतीय सेना ने पहली बार पांच महिला अधिकारियों को अपनी आर्टिलरी रेजिमेंट (तोपखाना रेजिमेंट) में शामिल किया है। महिला अधिकारी चेन्नई में ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) में अपना प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी में शामिल हो गई हैं। ओटीए चेन्नई में हुई पासिंग आउट परेड में 186 कैंडिडेट शामिल थे। इनमें 29 कैंडिडेट भूटान के नागरिक हैं। पासिंग आउट परेड का रिव्यू बांग्लादेश के सेना प्रमुख सीओएएस जनरल एसएम शफीउद्दीन अहमद ने किया।
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रिपोर्ट के अनुसार रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी में शामिल होने वाली महिला अधिकारियों में लेफ्टिनेंट महक सैनी, लेफ्टिनेंट साक्षी दुबे, लेफ्टिनेंट अदिति यादव और लेफ्टिनेंट पवित्र मुदगिल शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार पांच महिला अधिकारियों में से तीन को चीन की सीमा पर तैनात इकाइयों में तैनात किया गया है और अन्य दो को पाकिस्तान से लगती सीमा के पास “चुनौतीपूर्ण स्थानों” पर तैनात किया गया है। आर्टिलरी की रेजिमेंट एक प्रमुख मुकाबला समर्थन शाखा है, और इसमें लगभग 280 इकाइयां हैं जो बोफोर्स हॉवित्जर, धनुष, एम-777 हॉवित्जर और के-9 वज्र स्व-चालित बंदूकों सहित विभिन्न बंदूक प्रणालियों को संभालती हैं।
भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में महिलाओं का शामिल होना ऐतिहासिक माना जा रहा है। अभी तक महिलाएं के लिए सेना के इंजीनियर्स कोर, आर्मी एयर डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकलजज एडवोकेट जनरल डिपार्टमेंट, मेडिकल कॉर्प्स इंजीनियर्स, मिलिट्री नर्सिंग सर्विस जैसी सेवाओं में विशेष कैडर था, लेकिन अब सेना ने महिलाओं और पुरुषों के बीच का फर्क खत्म करने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है।
सूत्रों ने यह भी कहा कि युवा महिला अधिकारियों को सभी प्रकार की प्रमुख तोपखाना इकाइयों में तैनात किया जा रहा है, जहां उन्हें रॉकेट, फील्ड और निगरानी, और लक्ष्य अधिग्रहण (एसएटीए) प्रणाली, साथ ही प्रमुख उपकरण संभालने के लिए पर्याप्त प्रशिक्षण और अनुभव प्राप्त होगा।
जनवरी में थल सेनाध्यक्ष जनरल मनोज पांडे ने आर्टिलरी इकाइयों में महिला अधिकारियों को नियुक्त करने के निर्णय की घोषणा की। बाद में इस प्रस्ताव को सरकार ने मंजूरी दे दी थी।
भारत सरकार की तरफ से जारी की गई जानकारी के मुताबिक, तीनों सेनाओं की बात की जाए तो कुल 9,118 महिलाएं हैं जो सेना में कार्यरत हैं। साल 2019 से मुकाबले 2020 में भारत की तीनों सेनाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ी है। भारत में महिलाएं अब केवल थल तक ही सीमित नहीं है। देश में महिलाएं सबसे ज्यादा नेवी में काम कर रही हैं।
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