भारतीय सेना (Indian Army) ने अपनी परिचालन क्षमताओं के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए वर्ष 2026 को ‘नेटवर्किंग एवं डेटा-केंद्रितता का वर्ष (Year of Networking & Data Centricity)’ घोषित किया है। यह घोषणा जनवरी 2026 में थल सेनाध्यक्ष (COAS) जनरल उपेन्द्र द्विवेदी के नेतृत्व में की गई, जो भविष्य के लिए तैयार, प्रौद्योगिकी-आधारित सेना के निर्माण की दीर्घकालिक दृष्टि का हिस्सा है।
यह पहल डिजिटल एकीकरण, रियल-टाइम डेटा साझा करने और डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया पर भारतीय सेना के बढ़ते फोकस को दर्शाती है, जो आधुनिक युद्ध के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों और प्रतियोगी परीक्षा उम्मीदवारों के लिए यह विकास रक्षा सुधार, सुरक्षा में प्रौद्योगिकी और समसामयिक घटनाओं के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
‘नेटवर्किंग एवं डेटा-केंद्रितता – 2026’ एक रणनीतिक पहल है, जिसका उद्देश्य डेटा को एक महत्वपूर्ण परिचालन संसाधन के रूप में स्थापित करना है। इसके तहत भारतीय सेना उन्नत नेटवर्किंग प्रणालियों का उपयोग कर सभी स्तरों पर निर्बाध कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी।
स्थिति की बेहतर समझ (Situational Awareness) बढ़ाना, निर्णय लेने की गति तेज करना और एकीकृत डिजिटल नेटवर्क व रियल-टाइम डेटा प्रवाह के माध्यम से युद्ध क्षमता को सुदृढ़ करना।
आधुनिक युद्ध केवल भौतिक शक्ति तक सीमित नहीं है। यह तेजी से सूचना प्रभुत्व (Information Dominance) पर निर्भर होता जा रहा है, जहाँ जो बल डेटा को तेजी से एकत्र, संसाधित और उस पर कार्रवाई कर सकता है, उसे निर्णायक बढ़त मिलती है।
1. सैन्य अभियानों में नेटवर्किंग
इस पहल के अंतर्गत भारतीय सेना निम्न के बीच निर्बाध डिजिटल संपर्क स्थापित करने पर कार्य कर रही है:
यह परस्पर जुड़ा वातावरण बहु-क्षेत्रीय अभियानों में त्वरित संचार और समन्वित कार्रवाई को संभव बनाता है।
2. डेटा-केंद्रित संचालन
डेटा-केंद्रितता का फोकस है:
इससे कमांडरों को जटिल और तेजी से बदलती युद्ध स्थितियों में भी त्वरित, सूचित और सटीक निर्णय लेने में मदद मिलती है।
2026 को नेटवर्किंग एवं डेटा-केंद्रितता का वर्ष घोषित करना भारतीय सेना के व्यापक सुधार लक्ष्यों के अनुरूप है।
1. संयुक्तता (Jointness)
यह पहल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच संयुक्त अभियानों को बढ़ावा देती है, जिससे साझा डेटा प्लेटफॉर्म और अंतर-संचालनीय (Interoperable) संचार प्रणालियाँ संभव होती हैं।
2. स्वदेशीकरण (Indigenisation)
स्वदेशी तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया है, जैसे:
यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को सुदृढ़ करता है।
3. डिजिटल एकीकरण
सेना का लक्ष्य पुराने (Legacy) प्रणालियों को आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ एकीकृत करना है, ताकि सुरक्षा से समझौता किए बिना सूचना का सुचारु प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके।
इस घोषणा से पहले भारतीय सेना ने 2024–25 को ‘प्रौद्योगिकी अवशोषण का वर्ष (Year of Technology Absorption)’ के रूप में मनाया था।
2024–25 और 2026 का संबंध:
सरल शब्दों में, पहले चरण में आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए, जबकि 2026 की पहल यह सुनिश्चित करती है कि ये उपकरण दैनिक सैन्य अभियानों में पूरी तरह एकीकृत हों।
नेटवर्किंग एवं डेटा-केंद्रितता का वर्ष भारतीय सेना के एक दशक लंबे रूपांतरण रोडमैप का हिस्सा है, जो निम्न पर आधारित है:
इस परिवर्तन का उद्देश्य भारतीय सेना को भविष्य के संघर्षों, जैसे हाइब्रिड युद्ध, साइबर खतरे और सूचना युद्ध के लिए तैयार करना है।
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