सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है, जिससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नियम और कड़े हो गए हैं। संशोधित आईटी नियम 2021 के तहत अब एआई-जनित (AI-generated) सामग्री पर “स्पष्ट और प्रमुख” लेबल लगाना अनिवार्य होगा और अवैध सामग्री हटाने की समय-सीमा 36 घंटे से घटाकर केवल तीन घंटे कर दी गई है। ये बदलाव 20 फरवरी 2026 से लागू होंगे। इनका उद्देश्य डीपफेक, भ्रामक सूचना और गैर-सहमति से साझा की जाने वाली सामग्री पर नियंत्रण करना तथा मध्यस्थों की जवाबदेही बढ़ाना है।
नए नियमों के अनुसार, प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई-जनित या सिंथेटिक जनरेटेड इंफॉर्मेशन (SGI) पर स्पष्ट और प्रमुख रूप से दिखाई देने वाला लेबल लगाया जाए। पहले प्रस्ताव था कि लेबल सामग्री के कम से कम 10% हिस्से पर हो, लेकिन तकनीकी कंपनियों से परामर्श के बाद यह सीमा हटा दी गई। हालांकि, एक बार एआई लेबल लगाने के बाद उसे हटाया या दबाया नहीं जा सकेगा। इस प्रावधान का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और उपयोगकर्ताओं को कृत्रिम या छेड़छाड़ की गई सामग्री की पहचान करने में सहायता देना है।
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव सामग्री हटाने की समय-सीमा में किया गया है। अब प्लेटफॉर्म्स को अवैध सामग्री तीन घंटे के भीतर हटानी होगी, जबकि पहले यह सीमा 36 घंटे थी। गैर-सहमति से साझा की गई निजी या अंतरंग तस्वीरों के मामलों में यह समय-सीमा घटाकर केवल दो घंटे कर दी गई है। यदि प्लेटफॉर्म निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई नहीं करते, तो वे आईटी अधिनियम के तहत मिलने वाली “सेफ हार्बर” सुरक्षा खो सकते हैं।
सेफ हार्बर एक कानूनी सुरक्षा प्रावधान है, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उपयोगकर्ताओं द्वारा डाली गई सामग्री के लिए जिम्मेदारी से बचाता है, बशर्ते वे निर्धारित सावधानी मानकों का पालन करें। यदि प्लेटफॉर्म नई तीन घंटे की समय-सीमा का पालन नहीं करते, तो यह सुरक्षा समाप्त हो सकती है। सरकार का तर्क है कि त्वरित कार्रवाई से हानिकारक सामग्री के वायरल होने से रोका जा सकता है, जबकि कुछ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी सख्त समय-सीमा से अति-सेंसरशिप और संचालन संबंधी चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं।
संशोधित नियमों में SGI की परिभाषा स्पष्ट की गई है। एआई के सहायक या गुणवत्ता-सुधार वाले उपयोगों को इसमें छूट दी गई है। सद्भावना में किया गया सामान्य ऑडियो, वीडियो या ऑडियो-विजुअल संपादन SGI के दायरे में नहीं आएगा। लेकिन यदि प्लेटफॉर्म को पता चलता है कि उसकी सेवाओं का उपयोग अवैध SGI बनाने में हो रहा है, तो उसे तुरंत कार्रवाई करनी होगी, जैसे सामग्री हटाना, एक्सेस रोकना या उपयोगकर्ता खाते को निलंबित करना।
नए नियमों के तहत मध्यस्थों को उचित तकनीकी उपाय अपनाने होंगे ताकि अवैध SGI के प्रसार को रोका जा सके। उपयोगकर्ताओं को यह घोषित करना होगा कि सामग्री एआई-जनित है, और प्लेटफॉर्म को इस घोषणा की पुष्टि कर प्रमुख लेबल प्रदर्शित करना होगा। साथ ही, ऐसे SGI को रोकना होगा जो वास्तविक घटनाओं या किसी व्यक्ति की पहचान को गलत तरीके से प्रस्तुत करता हो, जिससे डीपफेक जैसी समस्याओं पर नियंत्रण पाया जा सके।
ये संशोधन ऐसे समय में आए हैं जब वैश्विक स्तर पर डीपफेक और एआई के दुरुपयोग को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। एआई-निर्मित आपत्तिजनक सामग्री और भ्रामक सूचनाओं की घटनाओं ने नियामकीय सख्ती की आवश्यकता को रेखांकित किया है। भारत के संशोधित आईटी नियम 2021 डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अधिक जवाबदेही, पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
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