भारत का लक्ष्य 2035 तक स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 तक मानवयुक्त चंद्र मिशन स्थापित करना: डॉ. जितेंद्र सिंह

भारत वैश्विक अंतरिक्ष दौड़ में नए और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय कर रहा है। लोकसभा में बोलते हुए केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार की उस दृष्टि को दोहराया जिसके अंतर्गत वर्ष 2035 तक एक पूर्ण रूप से परिचालित भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने और वर्ष 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजने की योजना है। इन अभियानों को “विकसित भारत 2047” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धियों के रूप में देखा जा रहा है।

भारत की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाएँ: आईएसएस से चंद्रमा तक

डॉ. सिंह की घोषणा उस विशेष संसदीय सत्र के दौरान हुई, जो भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन सुभांशु शुक्ला के ऐतिहासिक मिशन के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। शुक्ला अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहुँचने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री बने। इस उपलब्धि को राष्ट्रीय गौरव का क्षण और देश की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं का प्रतीक बताया गया।

मंत्री ने अगले बड़े लक्ष्य स्पष्ट किए:

  • भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (2035 तक): एक स्थायी, स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन जो भारत को दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष उड़ानों की श्रेणी में ले जाएगा।

  • मानवयुक्त चंद्र मिशन (2040 तक): एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह पर कदम रखेगा, जो भारत की अंतरिक्ष खोज यात्रा में ऐतिहासिक मील का पत्थर होगा।

दृष्टि की नींव: 11 वर्षों की अंतरिक्ष सुधार यात्रा

डॉ. सिंह ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत की अंतरिक्ष यात्रा में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं, विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में। उन्होंने कई नीतिगत सुधारों को इस महत्वाकांक्षी दिशा की आधारशिला बताया।

मुख्य विकास:

  • अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की भागीदारी: इससे नवाचार का एक नया इकोसिस्टम तैयार हुआ है और अनेक स्पेस-टेक स्टार्टअप सामने आए हैं।

  • अनुसंधान एवं विकास में वृद्धि: अत्याधुनिक शोध ने इसरो की क्षमताओं को और मजबूत किया और स्वदेशी तकनीकी उपलब्धियों को बढ़ावा दिया।

  • ऑपरेशन सिंदूर: इस ऑपरेशन में उपयोग की गई तकनीकें मोदी सरकार के कार्यकाल में विकसित की गईं, जिससे अंतरिक्ष तकनीक की वास्तविक जीवन उपयोगिता सिद्ध हुई।

सामाजिक-आर्थिक प्रभाव

मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि भारत का अंतरिक्ष अनुसंधान केवल रॉकेट और उपग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और जनकल्याण से भी गहराई से जुड़ा हुआ है।

प्रमुख लाभ:

  • कृषि, आपदा प्रबंधन और शहरी नियोजन में उपग्रह डेटा का उपयोग

  • परिवहन और लॉजिस्टिक्स में नेविगेशन और संचार प्रणाली की भूमिका

  • आधारभूत ढाँचे के विकास और पर्यावरण निगरानी में रिमोट सेंसिंग की सहायता

इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि अंतरिक्ष तकनीक जीवन की गुणवत्ता सुधारने और आर्थिक विकास को गति देने में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रही है।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘Women in Agri-Food Systems’ वैश्विक सम्मेलन को संबोधित किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 मार्च 2026 को नई दिल्ली में आयोजित कृषि-खाद्य प्रणालियों में…

15 hours ago

World Sleep Day 2026:अच्छी नींद क्यों है सेहत के लिए जरूरी?

World Sleep Day 2026: शरीर की क्रियाओं का नींद सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके बगैर…

16 hours ago

लाड़ली बहना योजना: 34वीं किस्त की राशि महिलाओं के खातों में भेजी गई, जानें इस योजना के बारे में

मध्य प्रदेश सरकार ने 13 मार्च 2026 को लाडली बहना योजना की 34वीं किस्त जारी…

16 hours ago

BIM10 टूर्नामेंट विवाद: तीन खिलाड़ियों को किया गया सस्पेंड

इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने बारबाडोस में आयोजित Bim10 लीग 2023/24 के दौरान भ्रष्टाचार के…

17 hours ago

Iran Crisis: अमित शाह की अगुवाई में भारत सरकार का विशेष पैनल गठित

केंद्र सरकार ने ईरान में जारी संकट को देखते हुए स्थिति पर करीब से नजर…

18 hours ago

EPFO से जुड़कर South Indian Bank ने शुरू की EPF पेमेंट सर्विस

साउथ इंडियन बैंक (South Indian Bank) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees' Provident Fund Organisation)…

18 hours ago