भारत अपना पहला व्यापक कार्बन ट्रेडिंग कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी में

भारत अपने पहले व्यापक कार्बन ट्रेडिंग कार्यक्रम को शुरू करने के अंतिम चरण में है, जिसका उद्देश्य औद्योगिक उत्सर्जन को विनियमित और रिपोर्ट करना है। यह योजना देश की जलवायु कार्यनीति (Climate Action Framework) में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। Bureau of Energy Efficiency (BEE) के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्यक्रम अप्रैल 2025 से मार्च 2026 की अवधि को कवर करेगा। पारदर्शिता और अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सत्यापनकर्ताओं (Verifiers) के साक्षात्कार वर्तमान में जारी हैं।

कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) क्या है?

कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS) भारत का पहला अनुपालन-आधारित (Compliance-Based) कार्बन बाजार है। इस व्यवस्था के तहत उद्योगों को उत्सर्जन लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे। जो इकाइयाँ निर्धारित सीमा से कम उत्सर्जन करेंगी, वे कार्बन क्रेडिट अर्जित कर सकेंगी, जबकि सीमा से अधिक उत्सर्जन करने वाली इकाइयों को क्रेडिट खरीदने होंगे या दंड का सामना करना पड़ेगा। BEE ने अक्टूबर 2025 और जनवरी 2026 में जारी अधिसूचनाओं के माध्यम से सात क्षेत्रों की लगभग 490 औद्योगिक इकाइयों को उत्सर्जन लक्ष्य आवंटित कर दिए हैं।

इस्पात और उर्वरक क्षेत्र अभी शामिल नहीं

हालाँकि इस योजना का लक्ष्य अंततः लगभग 800 इकाइयों को शामिल करना है, जो भारत के अधिकांश औद्योगिक उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं, लेकिन पहले चरण में इस्पात और उर्वरक क्षेत्र को शामिल नहीं किया गया है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इस्पात और उर्वरक क्षेत्र यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) के अंतर्गत आते हैं, जो जनवरी से लागू हुआ है और उच्च उत्सर्जन वाले उत्पादों के निर्यात पर कार्बन कर लगाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के चरणों में इन क्षेत्रों को शामिल करना अंतरराष्ट्रीय व्यापार दबावों और जलवायु प्रतिबद्धताओं को संतुलित करने के लिए आवश्यक होगा।

देरी नहीं, योजना तय समय पर

BEE के निदेशक सौरभ दीदी ने स्पष्ट किया है कि योजना में कोई देरी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि 490 इकाइयों के लिए उत्सर्जन लक्ष्य पहले ही अधिसूचित किए जा चुके हैं और कार्यान्वयन निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ रहा है। यह कार्बन बाजार उद्योगों को उत्सर्जन की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से करने और स्वच्छ उत्पादन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

वैश्विक स्तर पर कड़े होते जलवायु नियमों के बीच भारत का यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक घरेलू कार्बन बाजार ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देगा, हरित प्रौद्योगिकी को अपनाने के लिए प्रेरित करेगा, भारतीय निर्यातकों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करेगा और भारत को वैश्विक जलवायु प्रतिबद्धताओं के अनुरूप आगे बढ़ने में मदद करेगा। सफल क्रियान्वयन की स्थिति में यह योजना भारत की निम्न-कार्बन विकास रणनीति का एक प्रमुख स्तंभ बन सकती है।

MCQs: भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम (CCTS)

Q1. भारत का पहला बड़ा कार्बन-ट्रेडिंग प्रोग्राम कौन सी संस्था लागू कर रही है?
(a) SEBI
(b) NITI आयोग
(c) ब्यूरो ऑफ़ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE)
(d) पर्यावरण मंत्रालय
(e) NABARD

जवाब: (c)
जवाब: ब्यूरो ऑफ़ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम लागू कर रहा है।

Q2. भारत की कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम के पहले फेज़ में लगभग कितनी इंडस्ट्रियल यूनिट्स शामिल हैं?
(a) 300
(b) 400
(c) 490
(d) 650
(e) 800

जवाब: (c)
जवाब: सात सेक्टर्स में लगभग 490 यूनिट्स को एमिशन टारगेट जारी किए गए हैं।

Q3. भारत के कार्बन ट्रेडिंग प्रोग्राम के पहले फेज़ के लिए कम्प्लायंस पीरियड है:
(a) अप्रैल 2024 – मार्च 2025
(b) जनवरी 2025 – दिसंबर 2025
(c) अप्रैल 2025 – मार्च 2026
(d) जनवरी 2026 – दिसंबर 2026
(e) अप्रैल 2026 – मार्च 2027

जवाब: (c)
Sol: यह प्रोग्राम अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक कवर करता है।

Q4. कार्बन मार्केट के पहले फेज़ में कौन से दो बड़े सेक्टर शामिल नहीं हैं?

(a) पावर और सीमेंट
(b) स्टील और फर्टिलाइज़र
(c) टेक्सटाइल और केमिकल्स
(d) ऑयल और गैस
(e) ऑटोमोबाइल और एविएशन

जवाब: (b)
Sol: स्टील और फर्टिलाइज़र सेक्टर को अभी पहले फेज़ में शामिल किया जाना बाकी है।

Q5. यूरोपियन यूनियन के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) का मुख्य मकसद है:
(a) डिजिटल ट्रेड को बढ़ावा देना
(b) एक्सपोर्ट सब्सिडी देना
(c) ज़्यादा एमिशन वाले इंपोर्ट पर कार्बन टैक्स लगाना
(d) विदेशी इन्वेस्टमेंट बढ़ाना
(e) खेती के एक्सपोर्ट को रेगुलेट करना

जवाब: (c)
जवाब: CBAM, EU में ज़्यादा एमिशन वाले सामान के इंपोर्ट पर कार्बन टैक्स लगाता है।

Q6. कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग स्कीम के तहत, जो इंडस्ट्री अपनी तय लिमिट से कम एमिशन करती हैं, वे:
(a) एक्स्ट्रा टैक्स दे सकती हैं
(b) ऑपरेशन बंद कर सकती हैं
(c) कार्बन क्रेडिट कमा सकती हैं और बेच सकती हैं
(d) कोयले को बिना किसी रोक-टोक के इंपोर्ट कर सकती हैं
(e) एमिशन की रिपोर्टिंग से बच सकती हैं

जवाब: (c)
जवाब: लिमिट से कम एमिशन करने वाली यूनिट कार्बन क्रेडिट कमा सकती हैं और उनका ट्रेड कर सकती हैं।

Q7. बाद के फेज़ में लगभग 800 यूनिट को शामिल करने से भारत के इंडस्ट्रियल एमिशन का लगभग कितना हिस्सा कवर होगा? (a) थोड़ा हिस्सा
(b) आधा
(c) लगभग सभी
(d) एक-चौथाई
(e) एक-तिहाई

जवाब: (c)
जवाब: 800 यूनिट तक बढ़ाने का मकसद लगभग सभी इंडस्ट्रियल एमिशन को कवर करना है।

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vikash

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