भारत ने कार्ल्सबर्ग रिज में पॉलीमेटेलिक सल्फाइड अन्वेषण के लिए विशेष अधिकार हासिल किए

पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने 20 सितम्बर 2025 को एक ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा की। भारत को हिन्द महासागर के कार्ल्सबर्ग रिज क्षेत्र में पॉलीमेटालिक सल्फ़ाइड्स (PMS) की खोज के लिए विशेष अधिकार प्राप्त हुए हैं। समुद्री विज्ञान मंत्रालय (MoES) और इंटरनेशनल सीबेड अथॉरिटी (ISA) के बीच हुए 15 वर्ष के अनुबंध के तहत भारत को 10,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का अन्वेषण करने की अनुमति मिली है। इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया का पहला देश बन गया है जिसके पास दो PMS अन्वेषण अनुबंध हैं। यह कदम भारत की गहरे समुद्री संसाधन खोज (Deep-Sea Exploration) में बढ़ती नेतृत्वकारी भूमिका और डीप ओशन मिशन के तहत ब्लू इकॉनमी पहलों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस उपलब्धि का महत्व

भारत की समुद्री उपस्थिति को मजबूती:
कार्ल्सबर्ग रिज़ में अधिकार हासिल करके भारत ने हिन्द महासागर में अपनी रणनीतिक उपस्थिति बढ़ाई है और भविष्य में संसाधनों के उपयोग के लिए राष्ट्रीय क्षमता विकसित की है।

डीप ओशन मिशन का समर्थन:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च किए गए डीप ओशन मिशन के प्रमुख उद्देश्य हैं:

  • समुद्र तल की खनिज संपदाओं का अन्वेषण

  • खनन तकनीकों का विकास

  • भारत की ब्लू इकॉनमी पहलों को सशक्त करना

नए अनुबंध से भारत की समुद्री विज्ञान और प्रौद्योगिकी में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति मजबूत हुई है।

दो PMS अनुबंध रखने वाला पहला देश:
भारत अब इन क्षेत्रों में PMS अन्वेषण अनुबंध रखता है:

  • सेंट्रल इंडियन रिज़ और साउथवेस्ट इंडियन रिज़

  • कार्ल्सबर्ग रिज़ में नया PMS अनुबंध

इससे भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री तल पर PMS अन्वेषण क्षेत्र का सबसे बड़ा धारक बन गया है।

पॉलीमेटालिक सल्फ़ाइड्स (PMS) क्या हैं:
PMS समुद्र तल पर हाइड्रोथर्मल गतिविधि से बनने वाले मूल्यवान धातुओं के समृद्ध भंडार हैं।
मुख्य धातुएँ: लोहा, तांबा, जिंक, चांदी, सोना, प्लैटिनम
इनकी रणनीतिक और व्यावसायिक मूल्य के कारण PMS अन्वेषण पर वैश्विक ध्यान बढ़ रहा है।

भारत और ISA का 30 वर्षीय साझेदारी:

  • भारत अंतरराष्ट्रीय जल में Polymetallic Nodules के लिए सबसे पहले अन्वेषण क्षेत्र प्राप्त करने वाला देश था।

  • ISA द्वारा “Pioneer Investor” के रूप में मान्यता प्राप्त।

  • दो PMS अनुबंधों के साथ भारत समुद्री तल अन्वेषण में अपनी दीर्घकालीन नेतृत्व भूमिका को फिर से स्थापित करता है।

  • भारत 18–20 सितंबर 2025 को गोवा में 8वीं ISA वार्षिक ठेकेदार बैठक की मेजबानी करेगा।

मुख्य तथ्य:

  • घोषित किया: डॉ. जितेंद्र सिंह, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

  • अनुबंध अवधि: 15 वर्ष

  • आवंटित क्षेत्र: 10,000 वर्ग किलोमीटर, कार्ल्सबर्ग रिज़, हिन्द महासागर

  • संस्था: Ministry of Earth Sciences (MoES), National Centre for Polar and Ocean Research (NCPOR)

  • वैश्विक महत्व: भारत पहला देश बन गया जिसके पास दो PMS अनुबंध हैं

  • ISA: 1994 में स्थापित, मुख्यालय किंग्स्टन, जमैका

  • UNCLOS: 1982 में अपनाया गया, समुद्री तल संसाधनों को नियंत्रित करता है

  • डीप ओशन मिशन: जून 2021 में पीएम मोदी द्वारा लॉन्च, ब्लू इकॉनमी और गहरे समुद्री अन्वेषण पर केंद्रित

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

ऑस्कर 2026 नामांकन: सर्वश्रेष्ठ फिल्म, अभिनेता और अभिनेत्री की पूरी सूची जारी

98th Academy Awards के लिए नामांकन की घोषणा कर दी गई है, जिसमें फिल्म निर्माण…

1 day ago

सूर्या मिधा ने तोड़ा मार्क ज़करबर्ग का रिकॉर्ड, बने सबसे युवा सेल्फ मेड बिलियनेयर

फोर्ब्स की वर्ल्ड्स बिलियनेयर्स लिस्ट में शामिल होने वाले भारतीय मूल के 22वर्षीय सूर्या मिधा…

1 day ago

चिराग पासवान ने असम में PMFME इनक्यूबेशन सेंटर का शुभारंभ किया

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने 13 मार्च 2026 को सोनितपुर जिले के…

2 days ago

इसरो की बड़ी सफलता: CE-20 क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने रॉकेट प्रौद्योगिकी में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते…

2 days ago

उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रक्षेपण से जापान में अलर्ट, संकट प्रबंधन टीम सक्रिय

उत्तर कोरिया ने 14 मार्च 2026 को पूर्वी सागर की ओर करीब 10 बैलिस्टिक मिसाइलें…

2 days ago

डिजिटल मैपिंग को बढ़ावा: सुजल गांव आईडी का शुभारंभ

जल शक्ति मंत्रालय ने जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत भारत के हर ग्रामीण…

2 days ago