भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़े ऐलान में भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने औपचारिक रूप से 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए भारत की बोली को मंजूरी दे दी है। यह फैसला नई दिल्ली में हुई एक विशेष आम बैठक (Special General Meeting) में लिया गया, जिससे भारत को 31 अगस्त 2025 की अंतिम तिथि से पहले अपना आधिकारिक प्रस्ताव प्रस्तुत करने का रास्ता साफ हो गया। अगर भारत सफल होता है, तो यह आयोजन 2010 के बाद ठीक दो दशक बाद फिर भारतीय धरती पर लौटेगा।
भारत की 2030 की बोली ऐतिहासिक और रणनीतिक—दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। यह वर्ष 2010 राष्ट्रमंडल खेलों की 20वीं वर्षगांठ होगी, जब पहली और अब तक की एकमात्र बार भारत ने इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन की मेजबानी की थी। उस संस्करण ने न केवल भारत के खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत किया, बल्कि बड़े पैमाने पर वैश्विक प्रतियोगिताओं को आयोजित करने की भारत की क्षमता को भी साबित किया।
2030 में दोबारा मेजबानी भारत की खेलों के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता, वैश्विक खेल साझेदारी, क्षेत्रीय विकास, पर्यटन और युवाओं को खेलों के माध्यम से प्रेरित करने का प्रतीक होगी।
IOA की मंजूरी यह संकेत देती है कि भारत अंतरराष्ट्रीय खेल समुदाय में खुद को एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में फिर स्थापित करना चाहता है। अब संघ राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (CGF) के नियमों के अनुसार भारत की अंतिम बोली रिपोर्ट (bid dossier) तैयार कर और प्रस्तुत करेगा। इसमें प्रस्तावित स्थल, बुनियादी ढांचा योजनाएं, लॉजिस्टिक क्षमताएं और सरकारी समर्थन शामिल होगा।
यह कदम भारत के स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी (Sports Diplomacy) पर बढ़ते फोकस को दर्शाता है और दीर्घकाल में ओलंपिक खेलों जैसे बड़े आयोजनों की मेजबानी की संभावनाओं को भी मजबूत करता है।
31 अगस्त 2025 तक औपचारिक बोली प्रस्तुति चयन प्रक्रिया का अगला अहम चरण होगा। अगर भारत बोली जीतता है, तो 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारियां तुरंत शुरू होंगी—जिसमें स्टेडियम उन्नयन, शहरी विकास और एथलीट प्रशिक्षण ढांचे में बड़े निवेश शामिल होंगे। इस आयोजन से भारत के खेल पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलेगा, युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी और भारतीय शहर एक बार फिर वैश्विक खेल मानचित्र पर प्रमुखता से उभरेंगे।
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