भारत ने 1965 के भारत–पाकिस्तान युद्ध की 60वीं वर्षगांठ का solemly (गौरवपूर्ण) रूप से आयोजन किया, जो देश के सैन्य इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह माह छह दशकों का प्रतीक है जब भारतीय सशस्त्र बलों के वीर प्रयासों ने रणनीतिक विजय हासिल की और देश की संप्रभुता की रक्षा के प्रति संकल्प को मजबूत किया। इस अवसर पर रक्षा मंत्रालय द्वारा एक श्रृंखला कार्यक्रम आयोजित की जा रही है, जिसमें उन सभी को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने युद्ध में संघर्ष किया, कष्ट उठाया और विजय प्राप्त की।
अवधि: 22 दिन (अगस्त–सितंबर 1965)
युद्ध भूमि, वायु और समुद्र पर लड़ा गया।
विशेष रूप से टैंक युद्ध, फाइटर जेट्स की डॉगफाइट्स और भारतीय सैनिकों की दृढ़ता के लिए याद किया जाता है।
मुख्य युद्धस्थल:
जम्मू और कश्मीर: पाकिस्तान की ऑपरेशन गिब्राल्टर के बाद शत्रुता शुरू हुई।
पंजाब सेक्टर: निर्णायक टैंक युद्ध, विशेषकर असाल उत्तर की लड़ाई।
राजस्थान फ्रंट: रेगिस्तानी क्षेत्र में पाकिस्तानी आक्रमण का मुकाबला।
भारतीय सैनिकों ने कठिन मौसम और प्रतिकूल परिस्थितियों में साहस और संयम का प्रदर्शन किया।
युद्ध स्टैलेमेट पर समाप्त हुआ, पर इसे नैतिक और रणनीतिक विजय माना जाता है, जिसमें दुश्मन को भारी क्षति हुई और भारत को कुछ क्षेत्रीय लाभ भी प्राप्त हुए।
केवल क्षेत्रीय रक्षा ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और सिद्धांतों की रक्षा।
भारत की द्रुत और निर्णायक प्रतिक्रिया की क्षमता को दर्शाया।
सशस्त्र बलों की तैयारी और आधुनिक उपकरणों की आवश्यकता को उजागर किया।
आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण की शुरुआत, जिसे बाद में और बढ़ाया गया।
सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच एकता और समन्वय की अहमियत।
युद्ध के वरिष्ठ सैनिकों ने अपने अनुभव साझा किए और युवाओं से भारतीय सशस्त्र बलों में शामिल होने की अपील की।
उनकी कहानियाँ — साहस, सहयोग और समर्पण — युवा पीढ़ी को प्रेरित करती हैं, जो शांति और तैयारी के बीच खड़ी है।
कार्यक्रम: 1965 भारत–पाकिस्तान युद्ध की 60वीं वर्षगांठ
युद्ध की अवधि: 22 दिन (अगस्त–सितंबर 1965)
प्रमुख लड़ाइयाँ: असाल उत्तर, लाहौर फ्रंट, कश्मीर ऑपरेशन्स
रक्षा मंत्री: राजनाथ सिंह
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