भारत और मालदीव ने डाक टिकट विमोचन के साथ मनाई मित्रता की 60वीं वर्षगांठ

भारत और मालदीव ने 25 जुलाई 2025 को अपने राजनयिक संबंधों की 60वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में स्मारक डाक टिकटों का विमोचन कर एक ऐतिहासिक क्षण को चिह्नित किया। इन टिकटों का अनावरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति डॉ. मोहम्मद मुइज़्ज़ु द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। डाक टिकटों में दोनों देशों की साझा समुद्री विरासत की सुंदर झलक देखने को मिलती है। यह प्रतीकात्मक पहल न केवल एक महत्वपूर्ण राजनयिक पड़ाव का स्मरण है, बल्कि भारत और मालदीव के बीच सांस्कृतिक, आर्थिक और समुद्री सहयोग की गहराई को भी दर्शाती है।

पृष्ठभूमि

  • भारत और मालदीव के बीच राजनयिक संबंध औपचारिक रूप से 1965 में स्थापित हुए, ठीक उसी समय जब मालदीव ने स्वतंत्रता प्राप्त की थी।
  • भारत उन पहले देशों में शामिल था, जिन्होंने नवस्वतंत्र मालदीव को मान्यता दी और उसके साथ औपचारिक संबंध स्थापित किए।
  • बीते दशकों में दोनों देशों ने व्यापार, सुरक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, बुनियादी ढांचे और जलवायु लचीलापन जैसे क्षेत्रों में मजबूत साझेदारी को विकसित किया है, जिससे द्विपक्षीय संबंध निरंतर सशक्त और बहुआयामी होते गए हैं।

स्मारक डाक टिकटों का महत्व

ये डाक टिकट भारत और मालदीव की साझा समुद्री परंपराओं और हिंद महासागर में ऐतिहासिक व्यापारिक संबंधों का दृश्य रूप प्रस्तुत करते हैं। केरल के बेयपोर से संबंधित पारंपरिक भारतीय नौका ‘उरु’ भारत की समृद्ध जहाज़ निर्माण परंपरा और प्राचीन समुद्री विरासत का प्रतीक है। वहीं, ‘वधु धोनी’, पारंपरिक मालदीवियन मछली पकड़ने वाली नौका, मालदीव की गहराई से जुड़ी समुद्री संस्कृति और द्वीपीय जीवनशैली को दर्शाती है। ये दोनों प्रतीक सदियों से चले आ रहे भारत और मालदीव के परस्पर सहयोग और मित्रता को दर्शाते हैं।

टिकट विमोचन के उद्देश्य

  • भारत और मालदीव के बीच 60 वर्षों की राजनयिक साझेदारी का उत्सव मनाना और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराना।

  • दोनों देशों को जोड़ने वाली सांस्कृतिक और समुद्री विरासत को प्रदर्शित करना।

  • साझा प्रतीकों के माध्यम से लोगों के बीच आपसी जुड़ाव को प्रोत्साहित करना।

  • वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत-मालदीव संबंधों की ऐतिहासिक गहराई के प्रति जागरूकता बढ़ाना।

डाक टिकटों की विशेषताएँ

  • इन टिकटों को पारंपरिक कारीगरी और ऐतिहासिक विरासत को दर्शाने के उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया है।

  • उरु: केरल के बेयपोर शिपयार्ड में हाथ से बनाई गई एक बड़ी लकड़ी की नौका (धो), जिसे ऐतिहासिक रूप से हिंद महासागर व्यापार के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

  • वधु धोनी: एक पारंपरिक मालदीवियन नौका, जिसे प्रवाल भित्तियों और तटीय क्षेत्रों में मछली पकड़ने के लिए उपयोग किया जाता है। यह आत्मनिर्भरता और समुद्री विरासत का प्रतीक है।

  • टिकटों की कलाकृति और डिज़ाइन में टिकाऊपन, परंपरा और क्षेत्रीय एकता को प्रमुखता से दर्शाया गया है।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

भरत कपूर कौन थे? जानिए उनकी शिक्षा, करियर और भारतीय सिनेमा में योगदान

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता भरत कपूर का 27 अप्रैल 2026 को उम्र से जुड़ी…

36 minutes ago

Symbiosis University ने एशिया की पहली UNESCO चेयर शुरू की

सिम्बायोसिस स्किल्स एंड प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी ने 'जेंडर इन्क्लूजन और स्किल डेवलपमेंट' पर एशिया की पहली…

16 hours ago

MobiKwik को RBI से NBFC की मंज़ूरी मिली, डिजिटल लेंडिंग के क्षेत्र में उतरने को तैयार

फिनटेक कंपनी One MobiKwik Systems को भारतीय रिज़र्व बैंक से नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) लाइसेंस…

16 hours ago

जानें कौन हैं एनालेना बेरबॉक, दिल्ली दौरे पर पहुंचीं UNGA अध्यक्ष

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की अध्यक्ष एनालेना…

17 hours ago

नीति आयोग की DPI@2047 पहल लॉन्च: 30 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य

भारत ने एक बड़े आर्थिक बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है, क्योंकि NITI Aayog…

17 hours ago

PV Sindhu ने BWF की परिषद के सदस्य के रूप में काम शुरू किया

दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू (PV Sindhu) ने विश्व बैडमिंटन महासंघ (BWF)…

17 hours ago