भारत सरकार ने देश के प्रदर्शन की तुलना 26 अंतरराष्ट्रीय सूचकांकों से करने की एक बड़ी पहल की घोषणा की है। इस प्रयास का उद्देश्य उन क्षेत्रों की पहचान करना है जहाँ भारत सुधार कर सकता है और वैश्विक रैंकिंग में अपनी स्थिति मजबूत कर सकता है। यह घोषणा संसद में सोमवार को सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह द्वारा की गई।
यह पहल ग्लोबल इंडाइसेज़ फॉर रिफ़ॉर्म्स एंड ग्रोथ (GIRG) प्लेटफ़ॉर्म का हिस्सा है। GIRG का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय तुलनाओं का उपयोग करके नीतिगत सुधारों को दिशा देना, शासन में सुधार करना और भारत की सांख्यिकीय व डेटा-रिपोर्टिंग प्रणाली को मज़बूत बनाना है।
सरकार इन 26 सूचकांकों को चार मुख्य विषयों के तहत ट्रैक करेगी:
अर्थव्यवस्था – वैश्विक स्तर पर भारत के आर्थिक प्रदर्शन की निगरानी।
विकास – सामाजिक प्रगति और मानव विकास संकेतकों का मूल्यांकन।
शासन – पारदर्शिता, लोकतंत्र और विधि-व्यवस्था का आकलन।
उद्योग – औद्योगिक वृद्धि और प्रतिस्पर्धात्मकता का विश्लेषण।
प्रत्येक सूचकांक की निगरानी एक निर्धारित मंत्रालय द्वारा की जाएगी, जो डेटा की जाँच, पद्धति की समीक्षा और भारत के नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के उपयोग को सुनिश्चित करेगा।
इस पूरी प्रक्रिया का समन्वय NITI Aayog के Development Monitoring and Evaluation Office (DMEO) द्वारा किया जाएगा। DMEO यह सुनिश्चित करेगा कि सभी सूचकांकों में डेटा संग्रह, विश्लेषण और रिपोर्टिंग सटीक और एकरूप रहे।
भारत पहले से ही GDP, CPI और IIP जैसे प्रमुख संकेतकों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तैयार करता है। GIRG इस प्रक्रिया को वैश्विक रैंकिंग्स तक विस्तार देता है, जहाँ अक्सर विभिन्न संस्थानों की कार्यप्रणालियाँ और डेटा गुणवत्ता भिन्न होती है।
मंत्रालय इन अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा अपनाई जाने वाली पद्धतियों की समीक्षा करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि भारत के आधिकारिक आंकड़े सही रूप से परिलक्षित हों।
एक महत्वपूर्ण सूचकांक डेमोक्रेसी इंडेक्स है, जिसकी पारदर्शिता और संभावित पक्षपात पर भारत पहले भी सवाल उठा चुका है। वर्तमान में भारत इस सूची में 41वें स्थान पर है और “Flawed Democracy (त्रुटिपूर्ण लोकतंत्र)” श्रेणी में आता है, जबकि मॉरीशस और बोत्सवाना जैसे देश भारत से ऊपर हैं। इस सूचकांक की कार्यप्रणाली की समीक्षा क़ानून एवं न्याय मंत्रालय द्वारा की जाएगी।
वैश्विक सूचकांकों की इस व्यवस्थित निगरानी के माध्यम से भारत का लक्ष्य डेटा-आधारित नीतिगत सुधारों को बढ़ावा देना, कमजोरियों को पहचानना और वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करना है। यह पहल शासन और आर्थिक विकास को मजबूत बनाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
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