भारत और जापान ने महत्वपूर्ण खनिज सहयोग पर समझौते पर हस्ताक्षर किए

भारत और जापान ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) पर सहयोग ज्ञापन (MoC) पर हस्ताक्षर किए हैं। स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीक के लिए आवश्यक इस संसाधन श्रेणी पर समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टोक्यो यात्रा के दौरान 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हुआ। यह कदम ऊर्जा परिवर्तन, आर्थिक लचीलापन और संसाधन सुरक्षा पर दोनों देशों की गहरी होती समझ और साझेदारी को दर्शाता है।

क्रिटिकल मिनरल्स क्यों महत्वपूर्ण हैं?

क्रिटिकल मिनरल्स, जिनमें रेयर अर्थ एलिमेंट्स भी शामिल हैं, आज की तकनीकी दुनिया के लिए अनिवार्य हैं—चाहे वह बैटरियां हों, सेमीकंडक्टर हों, सोलर पैनल हों या रक्षा प्रणालियां। जैसे-जैसे जलवायु लक्ष्यों और तकनीकी बदलावों के चलते इन खनिजों की वैश्विक मांग बढ़ रही है, वैसे-वैसे देश लचीली और स्थायी आपूर्ति श्रृंखलाएं सुरक्षित करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं।

भारत और जापान, जो इन संसाधनों के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर हैं, ने यह समझ लिया है कि कुछ गिने-चुने आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटाकर विविध और स्थायी खनिज पारितंत्र बनाना समय की मांग है।

भारत-जापान खनिज समझौते की मुख्य विशेषताएं

रणनीतिक उद्देश्य:

  • भारत और तृतीय देशों में संयुक्त अन्वेषण और खनन परियोजनाएं

  • नियामक और नीतिगत सूचनाओं का आदान-प्रदान

  • गहरे समुद्र में खनन हेतु टिकाऊ पद्धतियां

  • खनिज आपूर्ति स्थिरता हेतु भंडारण रणनीतियां

  • प्रसंस्करण और तकनीकी हस्तांतरण सहयोग

  • भविष्य में आपसी सहमति से नए सहयोग प्रारूप

यह सहयोग दोनों देशों को रणनीतिक कमजोरियों को कम करने और वैश्विक ऊर्जा व तकनीकी मूल्य श्रृंखलाओं में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद करेगा।

निवेश और नवाचार

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह समझौता जापान के साथ साझा आर्थिक दृष्टि का हिस्सा है, जिसमें अगले दशक में भारत में 10 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य रखा गया है। विशेष ध्यान एमएसएमई और स्टार्टअप्स को जोड़ने पर होगा ताकि नवाचार और तकनीक-आधारित विकास को गति दी जा सके।

दशक भर की साझेदारी के स्तंभ

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत-जापान संबंध अब आठ स्तंभों पर आधारित दशक भर की रूपरेखा पर खड़े हैं—

  1. निवेश और नवाचार

  2. आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा

  3. पर्यावरणीय स्थिरता

  4. तकनीकी सहयोग

  5. स्वास्थ्य सेवा और गतिशीलता साझेदारी

  6. जन-से-जन संबंध

  7. राज्य और प्रांत स्तर का सहयोग

  8. खनिज सहयोग, जो इन रणनीतिक लक्ष्यों के अनुरूप है

यह खनिज सहयोग समझौता द्विपक्षीय विश्वास और भविष्य की तैयारी को और मजबूत करता है।

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vikash

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