भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच एलपीजी (LPG) और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 को लागू किया है। यह कदम उस समय उठाया गया जब 28 फरवरी 2026 को इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधा की आशंका पैदा हुई।
घरेलू स्तर पर ऊर्जा की उपलब्धता बनाए रखने और किसी भी संभावित कमी से बचने के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एलपीजी और प्राकृतिक गैस के उत्पादन, वितरण और आवंटन को नियंत्रित करने संबंधी निर्देश जारी किए हैं।
इस अधिनियम को लागू करने के बाद सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी किए कि रसोई गैस और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति स्थिर बनी रहे।
मुख्य निर्देश इस प्रकार हैं—
आवश्यक वस्तु अधिनियम के साथ सरकार ने प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश 2026 भी जारी किया है, जिसका उद्देश्य देश में प्राकृतिक गैस के आवंटन को प्राथमिकता के आधार पर नियंत्रित करना है।
इस आदेश के तहत निम्न क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी—
इस प्राथमिकता व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जरूरी सेवाएं और कृषि उत्पादन ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी संभावित बाधा से प्रभावित न हों।
आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 भारतीय संसद द्वारा पारित एक कानून है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवश्यक वस्तुएं जनता को उचित कीमतों पर उपलब्ध रहें और उनकी जमाखोरी या कालाबाजारी न हो।
यह कानून सरकार को निम्न शक्तियां देता है—
इसका मुख्य उद्देश्य कमी को रोकना, कीमतों को स्थिर रखना और आवश्यक वस्तुओं का समान वितरण सुनिश्चित करना है।
सरकार सार्वजनिक आवश्यकता के अनुसार कुछ वस्तुओं को आवश्यक वस्तु (Essential Commodity) घोषित कर सकती है। समय-समय पर इसमें निम्न वस्तुएं शामिल रही हैं—
पेट्रोलियम उत्पाद जैसे LPG, पेट्रोल, डीजल और प्राकृतिक गैस
केंद्र सरकार परिस्थिति के अनुसार इस सूची में वस्तुओं को जोड़ या हटा सकती है।
हालांकि सरकार अभी भी युद्ध, अकाल या गंभीर प्राकृतिक आपदा जैसी असाधारण परिस्थितियों में आवश्यक वस्तु अधिनियम को लागू कर सकती है।
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