वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs ने भारत की GDP वृद्धि दर के अनुमान को 2026 के लिए घटाकर 5.9% कर दिया है, जो पहले 7% था। यह कटौती बढ़ती तेल कीमतों, वैश्विक आपूर्ति बाधाओं और रुपये पर दबाव के कारण की गई है। साथ ही पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की अनिश्चितता ने भारत के लिए जोखिम बढ़ा दिया है, क्योंकि भारत ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर है।
भारत की GDP ग्रोथ पर असर
गोल्डमैन सैक्स ने मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और वैश्विक बाधाओं को इस गिरावट का कारण बताया है। कुछ महीने पहले अनुमान 6.5% किया गया था, जिसे अब और घटाकर 5.9% कर दिया गया है।
भारत एक बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए तेल की कीमतों में वृद्धि से उत्पादन लागत बढ़ती है, जिससे उपभोग, निवेश और कुल आर्थिक विकास प्रभावित होता है।
तेल कीमतें और होर्मुज़ जलडमरूमध्य का प्रभाव
Strait of Hormuz संकट इस गिरावट का एक प्रमुख कारण है। अनुमान के अनुसार—
- मार्च में ब्रेंट क्रूड: $105 प्रति बैरल
- अप्रैल में: $115 प्रति बैरल
- 2026 के अंत तक: $80 प्रति बैरल
तेल कीमतों में वृद्धि से आयात बिल बढ़ता है, जिससे रुपये पर दबाव और महंगाई बढ़ती है।
महंगाई (Inflation) का अनुमान
गोल्डमैन सैक्स ने 2026 के लिए महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 4.6% कर दिया है, जो पहले 3.9% था। हालांकि यह भारतीय रिजर्व बैंकके 2–6% लक्ष्य दायरे में है, लेकिन ईंधन की कीमतों और रुपये की कमजोरी के कारण उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ सकता है।
RBI द्वारा ब्याज दर बढ़ने की संभावना
महंगाई को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है।
रेट बढ़ने का प्रभाव:
- लोन महंगे हो जाते हैं
- मांग कम होती है
- महंगाई नियंत्रित होती है
लेकिन इससे अल्पकाल में आर्थिक विकास धीमा भी हो सकता है।
रुपये की कमजोरी और प्रभाव
भारतीय रुपया 2026 में लगभग 4% कमजोर हुआ है (2025 में 4.7% गिरावट)। कमजोर रुपया आयात को महंगा बनाता है, खासकर तेल के लिए।
इसके प्रभाव:
- ईंधन और परिवहन लागत में वृद्धि
- महंगाई पर दबाव
- विदेशी मुद्रा भंडार पर असर


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