भारत ने घरेलू कीमतों को स्थिर करने के प्रयास में, विशेष रूप से प्रमुख राज्य चुनावों से पूर्व, चीनी निर्यात पर अपने प्रतिबंधों को अक्टूबर से आगे बढ़ाने का फैसला किया है। यह निर्णय संभावित रूप से वैश्विक चीनी कीमतों को प्रभावित कर सकता है और विश्व भर में खाद्य मूल्य मुद्रास्फीति में वृद्धि के बारे में चिंताएं बढ़ा सकता है।
भारत में विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) द्वारा जारी एक अधिसूचना में कहा गया है, चीनी (कच्ची चीनी, सफेद चीनी, परिष्कृत चीनी और जैविक चीनी) के निर्यात पर प्रतिबंध अक्टूबर से आगे बढ़ा दिया है।
यहां मुख्य बिंदुओं को संक्षेप में प्रस्तुत करने वाली एक सरल तालिका दी गई है:
| विषय | विवरण |
| निर्यात प्रतिबंधों पर पृष्ठभूमि | भारत ने दो वर्षों के लिए चीनी निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया है, पिछले सत्र में केवल 6.2 मिलियन मीट्रिक टन चीनी निर्यात करने की अनुमति दी गई थी। |
| प्रतिबंधों का वर्तमान विस्तार | भारत के डीजीएफटी ने विभिन्न प्रकार की चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध अक्टूबर से आगे बढ़ा दिया है। |
| वैश्विक कीमतों पर प्रभाव | विस्तारित प्रतिबंधों से वैश्विक स्तर पर बेंचमार्क चीनी की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे खाद्य कीमतों को लेकर चिंताएं पैदा हो सकती हैं। |
| विस्तार का कारण | भारत का लक्ष्य राज्य चुनावों से पूर्व घरेलू चीनी आपूर्ति बढ़ाना और कीमतें कम करना है। |
| आगामी चुनाव | राष्ट्रीय चुनावों से पहले राज्य के चुनाव निर्यात प्रतिबंधों के समय को प्रभावित करते हैं। |
| पिछले रोक एवं प्रतिबंध | भारत ने पहले चावल पर प्रतिबंध लगाया और प्याज पर निर्यात शुल्क लगाया, जिससे व्यापार प्रभावित हुआ। |
| चीनी उत्पादन पर प्रभाव | चीनी की कीमतें 7 वर्ष के उच्चतम स्तर पर हैं और खराब मानसून के कारण उत्पादन घटने की आशंका है। |
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