भारतीय सेना ने भारत-मिस्र संयुक्त विशेष बल अभ्यास के चौथे संस्करण के लिए मिस्र में अपनी टुकड़ी भेजी है, जिसे ‘साइक्लोन-IV’ के नाम से जाना जाता है। यह संस्करण 9 से 17 अप्रैल, 2026 तक आयोजित किया जाएगा। यह अभ्यास ‘अंशास’ में होगा और इसमें दोनों देशों के विशिष्ट सैनिक एक साथ शामिल होंगे। यह संयुक्त अभ्यास भारत और मिस्र के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को प्रदर्शित करता है, और साथ ही विभिन्न क्षेत्रों पर विशेष रूप से केंद्रित है।
इस अभ्यास के लिए भारतीय दल में 25 विशेष बल कर्मी शामिल हैं, जो मिस्र के सैनिकों के साथ मिलकर एक यथार्थवादी युद्धक वातावरण में प्रशिक्षण लेंगे; यह वातावरण विशेष रूप से रेगिस्तानी और अर्ध-रेगिस्तानी अभियानों के लिए अनुकूल है।
Cyclone-IV अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल (interoperability) को बेहतर बनाना है।
इस अभ्यास के मुख्य उद्देश्य ये हैं:
यह अभ्यास विशेष रूप से रेगिस्तानी और अर्ध-रेगिस्तानी इलाकों के लिए तैयार किया गया है, जहाँ कुछ अनोखी ऑपरेशनल चुनौतियाँ सामने आती हैं, जैसे:
इसमें हिस्सा लेने वाली सेनाएँ रेगिस्तानी परिस्थितियों में युद्ध के अभ्यास (कॉम्बैट सिमुलेशन) के साथ-साथ, विशेष ऑपरेशन की उन्नत रणनीतियों और अभ्यासों में शामिल होती हैं। इसके अलावा, वे तालमेल बिठाकर किए जाने वाले हमले और बचाव अभियानों के साथ-साथ, रणनीतिक चालों और जीवित रहने के अभ्यासों को भी अंजाम देंगी।
यह अभ्यास भारत और मिस्र के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी का एक प्रतिबिंब है।
यह साझेदारी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों देशों के क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता में साझा रणनीतिक हित हैं, और वे रक्षा, व्यापार तथा कूटनीति के क्षेत्रों में अपना सहयोग बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा, ऐसे संयुक्त अभ्यासों से आपसी विश्वास और परिचालन तालमेल (operational synergy) भी मज़बूत होगा।
‘अभ्यास साइक्लोन’ जैसे सैन्य सहयोग, पारंपरिक कूटनीति से परे जाकर द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक गहरा करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करते हैं।
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