भारत ने यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) देशों—स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन—के साथ ऐतिहासिक TEPA (Trade and Economic Partnership Agreement) लागू किया। यह भारत का पहला ऐसा व्यापार समझौता है जिसमें अगले 15 वर्षों में USD 100 अरब निवेश का स्पष्ट वचन शामिल है, जिससे भारत में 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की उम्मीद है।
1. निवेश और रोजगार प्रतिबद्धताएँ
EFTA देशों द्वारा अगले 15 वर्षों में भारत में USD 100 अरब निवेश का बाध्यकारी वचन।
निवेश से लगभग 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की संभावना।
यदि प्रतिबद्धताएँ पूरी नहीं होती हैं तो भारत टैरिफ़ रियायतें रोकने का अधिकार रखता है।
2. असमान टैरिफ़ कटौती
EFTA 99.6% भारतीय निर्यात पर शुल्क समाप्त करेगा।
भारत 95.3% EFTA के निर्यात पर टैरिफ़ धीरे-धीरे घटाएगा।
संवेदनशील क्षेत्रों जैसे सोना, डेयरी और कोयला को घरेलू सुरक्षा हेतु बाहर रखा गया।
3. सेवाओं में बाज़ार तक पहुँच
IT, लेखा, नर्सिंग, शिक्षा, ऑडियो-विज़ुअल सेवाएँ और Mode 4 (अस्थायी पेशेवर आवागमन) में भारतीय सेवा प्रदाताओं की पहुँच बढ़ेगी।
Mutual Recognition Agreements (MRAs) के जरिए योग्यताओं को मान्यता, जिससे भारतीय पेशेवरों की प्रविष्टि आसान होगी।
4. मूल नियम और व्यापार सुविधा
TEPA में Rules of Origin, कस्टम्स सहयोग, डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन और तेज़ विवाद समाधान के प्रावधान शामिल हैं।
इससे व्यापार में पूर्वानुमानयोग्यता बढ़ेगी और निर्यातक/आयातक पर अनुपालन बोझ कम होगा।
लाइफ साइंसेज और फार्मास्यूटिकल्स
स्वच्छ ऊर्जा और जियोथर्मल तकनीक
सटीक इंजीनियरिंग और उच्च-स्तरीय निर्माण
शिपबिल्डिंग, समुद्री लॉजिस्टिक्स और कंटेनर निर्माण
AI, डिजिटल सेवाएँ और R&D
शिक्षा, पर्यटन और क्रिएटिव इंडस्ट्रीज
सिद्धांत: भारत उच्च मांग और प्रतिभा लाता है, EFTA पूंजी, नवाचार और तकनीकी विशेषज्ञता। TEPA दोनों क्षेत्रों की आर्थिक पूरकता को दर्शाता है।
फार्मा, वस्त्र, खाद्य प्रसंस्करण, इंजीनियरिंग और समुद्री निर्यात में क्षेत्र-विशेष रोडमैप।
MSME आउटरीच प्रोग्राम और बायर-सप्लायर मैचमेकिंग।
गुणवत्ता मानक, पैकेजिंग और स्थिरता में क्षमता निर्माण।
लॉजिस्टिक्स सुधार पर केंद्रित प्रयास, ट्रांज़िट और पोर्ट ड्वेल समय घटाना।
FTA उपयोग, निवेश प्रवाह और सेवा व्यापार का संयुक्त निगरानी।
पूंजी-संपन्न अर्थव्यवस्थाओं से FDI प्रवाह में वृद्धि।
निर्माण और सेवाओं में उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार।
निर्यात गंतव्य का विविधीकरण और कुछ प्रमुख बाजारों पर निर्भरता कम।
यूरोप में भारत का भू-आर्थिक प्रभाव बढ़ना।
संतुलित और विकास-उन्मुख व्यापार समझौतों की भारत की क्षमता प्रदर्शित।
स्विस घड़ियाँ, मशीनरी और चिकित्सा उपकरण जैसी उच्च स्तरीय वस्तुओं तक बेहतर पहुँच।
EFTA देश: स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड, लिकटेंस्टीन
TEPA पर हस्ताक्षर: 10 मार्च 2024
लागू होने की तिथि: 1 अक्टूबर 2025
वार्ता की समयरेखा: 2008 में शुरू, 21 दौर के बाद निष्कर्ष
निवेश प्रतिबद्धता: USD 100 अरब, 15 वर्षों में
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