भारतीय वैज्ञानिकों ने 3D-प्रिंटिंग तकनीक से ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) विकसित कर एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि हासिल की है। ये स्वदेशी स्टेशन विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में अंतिम-मील (last-mile) मौसम डेटा संग्रह को मजबूत करेंगे। फरवरी 2026 से दिल्ली में इनके पहले इंस्टॉलेशन शुरू होंगे, जिससे मौसम पूर्वानुमान और जलवायु निगरानी की क्षमता बढ़ेगी।
भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने मिशन मौसम (Mission Mausam) के तहत 3D-प्रिंटेड ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन विकसित किए हैं। फरवरी 2026 से इनका पहला चरण दिल्ली में स्थापित किया जाएगा।
ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन एक स्वचालित प्रणाली है जो मौसम संबंधी मापदंड—जैसे तापमान, आर्द्रता, पवन और वर्षा—को लगातार मापकर रियल-टाइम में प्रसारित करती है। यह त्वरित चेतावनी, स्थानीय पूर्वानुमान और जलवायु अध्ययन के लिए अत्यंत उपयोगी है।
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