नेट-जीरो बैंकिंग एलायंस से हटने पर HSBC को आलोचना का सामना

जुलाई 2025 में, दुनिया के सबसे बड़े बैंकिंग संस्थानों में से एक, एचएसबीसी ने नेट-जीरो बैंकिंग अलायंस (एनजेडबीए) से हटने पर जलवायु के प्रति जागरूक ग्राहकों और हितधारकों की कड़ी आलोचना की, जो कि दुनिया का सबसे बड़ा उद्योग समूह है जो बैंकिंग प्रथाओं को जलवायु लक्ष्यों के साथ संरेखित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह एलायंस वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप बैंकिंग प्रथाओं को संरेखित करने के लिए समर्पित सबसे बड़ा उद्योग समूह है। HSBC ऐसा करने वाला पहला प्रमुख ब्रिटिश बैंक बन गया, जिससे यह संकेत मिला कि वित्तीय क्षेत्र की नेट-ज़ीरो उत्सर्जन लक्ष्य को लेकर प्रतिबद्धता कमजोर पड़ रही है। इस फैसले के बाद कई ग्राहकों, विशेषकर हरित ऊर्जा कंपनियों ने HSBC से अपने संबंध तोड़ दिए और इसके पर्यावरणीय दावों पर विश्वास नहीं होने का हवाला दिया।

पृष्ठभूमि: नेट-ज़ीरो बैंकिंग एलायंस (NZBA) क्या है?
अप्रैल 2021 में शुरू हुआ नेट-ज़ीरो बैंकिंग एलायंस (NZBA) संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम वित्त पहल (UNEP FI) द्वारा संचालित बैंकों का एक वैश्विक गठबंधन है। इसके सदस्य पेरिस समझौते के अनुरूप 2050 तक अपने ऋण और निवेश पोर्टफोलियो को नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के साथ संरेखित करने का संकल्प लेते हैं। इसमें शामिल बैंकों को हर पाँच साल में अंतरिम लक्ष्य तय करने और प्रगति की पारदर्शी रिपोर्टिंग करने की आवश्यकता होती है। इस गठबंधन का उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र को जलवायु-लचीला और सतत वित्तपोषण के मार्ग पर लाना है।

HSBC की वापसी और उसके पीछे का कारण
HSBC की NZBA से वापसी उसके चीफ सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर जूलियन वेंटज़ेल के उस बयान के बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा कि कार्बन-गहन उद्योगों के प्रति बढ़ते पूर्वाग्रह के कारण यह गठबंधन संतुलन खो रहा है। बैंक का तर्क है कि पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्रों को समर्थन देना ऊर्जा संक्रमण की अवधि में आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक है। हालांकि, इस कदम से HSBC की नैतिक प्रतिबद्धता और प्रतिष्ठा पर सवाल उठे हैं, खासकर जब उसने पूर्व में सार्वजनिक रूप से जलवायु परिवर्तन के खिलाफ ठोस कार्रवाई के वादे किए थे।

ग्राहकों की नाराज़गी और सार्वजनिक प्रतिक्रिया
प्रमुख हरित व्यवसाय नेताओं ने HSBC के फैसले पर तीव्र प्रतिक्रिया दी। नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की अग्रणी कंपनी Ecotricity, जिसका सालाना हरित कारोबार £600 मिलियन है, ने HSBC से सार्वजनिक रूप से संबंध तोड़ लिए। कंपनी के संस्थापक डेल विंस ने यह घोषणा की कि वे अब Lloyds Banking Group के साथ काम करेंगे। उन्होंने कहा कि ग्राहक अब जागरूक हो चुके हैं और नैतिक बैंकिंग विकल्पों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। विंस के बयान ने इस बात पर जोर दिया कि अब जलवायु मुद्दों पर वित्तीय जवाबदेही की मांग को लेकर आम लोगों और कंपनियों से जमीनी स्तर पर दबाव तेजी से बढ़ रहा है। व्यक्तियों और संस्थानों दोनों की ओर से यह मांग उठ रही है कि बैंक और वित्तीय संस्थाएं अपने पर्यावरणीय वादों के प्रति पारदर्शी और जिम्मेदार बनें।

बैंकिंग और जलवायु वित्त पर प्रभाव
HSBC का यह कदम अन्य वित्तीय संस्थानों को भी अपने पर्यावरणीय जुड़ावों पर पुनर्विचार के लिए प्रेरित कर सकता है, या फिर यह निर्णय HSBC को वैश्विक जलवायु निगरानी के बीच अलग-थलग भी कर सकता है। यह निर्णय एक बार फिर जलवायु आदर्शवाद और व्यवहारिक वित्त के बीच बहस को जन्म देता है—जहाँ बैंक उत्सर्जन में कटौती के लक्ष्यों और पारंपरिक जीवाश्म ईंधन में निवेश के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं। अब नियामक संस्थाएं, निवेशक और ग्राहक बैंकों को जलवायु पारदर्शिता, सततता मानदंड और सामाजिक ज़िम्मेदारी के आधार पर और भी बारीकी से आंक सकते हैं।

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vikash

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