भारतीय रेलवे ने रेल सुरक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए कवच संस्करण 4.0 को एक ही दिन में 472.3 रूट किलोमीटर पर सफलतापूर्वक चालू किया है। यह भारत के रेल इतिहास में कवच का अब तक का सबसे बड़ा एक-दिवसीय कमीशनिंग रिकॉर्ड है।
यह उन्नत सुरक्षा प्रणाली अब पश्चिम रेलवे, उत्तर रेलवे और पूर्व मध्य रेलवे के प्रमुख खंडों पर सक्रिय हो चुकी है। इस उपलब्धि के साथ, भारतीय रेलवे यात्री सुरक्षा को और मजबूत कर रहा है, दुर्घटना जोखिम को कम कर रहा है तथा एक स्मार्ट और सुरक्षित रेल नेटवर्क के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।
हालिया कमीशनिंग में शामिल खंड:
इस एक-दिवसीय उपलब्धि ने कोटा–मथुरा खंड (324 किमी) के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
यह सफलता तेज़ क्रियान्वयन, बेहतर समन्वय और भारत की स्वदेशी रेल सुरक्षा तकनीक पर बढ़ते भरोसे को दर्शाती है। इसके साथ ही, कवच 4.0 अब भारतीय रेलवे के पाँच ज़ोन में चालू हो चुका है, जो उच्च घनत्व वाले रेल कॉरिडोरों पर तकनीक-आधारित सुरक्षा की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
उत्तर रेलवे में 35 किमी तुगलकाबाद–पलवल खंड पर कवच 4.0 को चालू किया गया है, जो व्यस्त चार-लाइन दिल्ली–मुंबई मार्ग का हिस्सा है।
इस खंड में शामिल हैं:
यह कॉरिडोर उपनगरीय, यात्री और मालगाड़ियों का भारी यातायात संभालता है। यहाँ कवच की तैनाती से सिग्नल को खतरे की स्थिति में पार करने (SPAD) और ओवरस्पीडिंग जैसी घटनाओं को रोका जा सकेगा, जिससे परिचालन विश्वसनीयता में बड़ा सुधार होगा।
पश्चिम रेलवे ने 344 किमी वडोदरा–सूरत–वीरार खंड पर कवच 4.0 चालू कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह खंड दिल्ली–मुंबई मार्ग का हिस्सा है।
इस कॉरिडोर पर कार्य जनवरी 2023 में शुरू हुआ था और तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
आगामी लक्ष्य:
इससे मुंबई के रेल नेटवर्क में कवच की पहुँच और गहराई तक बढ़ेगी।
| शीर्षक | विवरण |
| अवलोकन (Overview) | कवच संस्करण 4.0 भारत की स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली का नवीनतम और सबसे उन्नत संस्करण है। इसे परिचालन अनुभव और स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकन के आधार पर लगातार तकनीकी उन्नयन के माध्यम से विकसित किया गया है। |
| अनुमोदन एवं प्रमाणीकरण (Approval & Certification) | रिसर्च डिज़ाइन्स एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइज़ेशन (RDSO) द्वारा अनुमोदित। स्वतंत्र सुरक्षा मूल्यांकनकर्ता (ISA) द्वारा प्रमाणित। वैश्विक सुरक्षा मानकों के अनुरूप तथा SIL-4 सुरक्षा स्तर (विश्व में सर्वोच्च) का अनुपालन। |
| डिज़ाइन एवं नेटवर्क अनुकूलता (Design & Network Compatibility) | भारत के उच्च घनत्व, बहु-लाइन और विविध रेल नेटवर्क के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन। बेहतर विश्वसनीयता और तेज़ प्रतिक्रिया समय सुनिश्चित करता है। मौजूदा सिग्नलिंग और इंटरलॉकिंग प्रणालियों के साथ सहज एकीकरण। |
| तकनीकी घटक (Technological Components) | रियल-टाइम निर्णय के लिए माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग। सटीक ट्रेन स्थिति निर्धारण हेतु GPS (ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम) का एकीकरण। ट्रेनों और ट्रैकसाइड उपकरणों के बीच निरंतर डेटा आदान-प्रदान के लिए रेडियो संचार प्रणाली। |
| सिग्नल सुरक्षा – SPAD (Signal Protection at Danger) | Signal Passing at Danger (SPAD) से स्वचालित सुरक्षा प्रदान करता है। लाल सिग्नल को अनजाने में पार करने से ट्रेनों को रोकता है। |
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