2025 में भारत कैसे बना वैश्विक शहरी विकास का प्रमुख इंजन?

संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारत वैश्विक शहरी विकास के प्रमुख इंजनों में से एक बनकर उभरा है। आज दुनिया की लगभग आधी आबादी शहरों में निवास करती है और इस परिवर्तन के केंद्र में भारत है। दिल्ली और मुंबई जैसे तेज़ी से फैलते महानगरों से लेकर तेजी से विकसित हो रहे छोटे शहरों तक, भारत की शहरी कहानी वैश्विक जनसंख्या रुझानों को नया आकार दे रही है। यह बदलाव जहाँ आर्थिक अवसरों को बढ़ाता है, वहीं आने वाले दशकों में आवास, बुनियादी ढाँचे, सतत विकास और शहरी शासन से जुड़ी गंभीर चुनौतियाँ भी सामने लाता है।

वैश्विक शहरी विकास में भारत की बढ़ती भूमिका

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में विश्व की लगभग 45% आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है, जो 1950 में केवल 20% थी। इस तेज़ शहरीकरण में भारत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। वर्तमान में भारत में 10 मिलियन से अधिक आबादी वाले पाँच मेगासिटी हैं। नई दिल्ली, जिसकी जनसंख्या 3 करोड़ से अधिक है, जकार्ता, ढाका और टोक्यो के साथ दुनिया के चार सबसे बड़े शहरों में शामिल है। इसके अलावा मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहर रोजगार, निवेश और आंतरिक प्रवासन के प्रमुख केंद्र बने हुए हैं।

शहरों की गणना का नया तरीका

2025 की UN रिपोर्ट में “डिग्री ऑफ अर्बनाइजेशन” पद्धति को अपनाया गया है। इसमें केवल प्रशासनिक सीमाओं के बजाय जनसंख्या आकार और घनत्व के आधार पर शहरों को परिभाषित किया गया है। इसका अर्थ यह है कि आधिकारिक नगर सीमा से बाहर स्थित लेकिन घनी आबादी वाले क्षेत्र भी अब शहरी क्षेत्र माने जा रहे हैं। इस बदलाव के कारण कई भारतीय और एशियाई शहरों की आबादी का अनुमान बढ़ा है, जिससे वैश्विक तुलना अधिक सटीक हो पाई है और यह बेहतर दर्शाता है कि लोग वास्तव में कैसे रहते और काम करते हैं।

एशिया का दबदबा और भारत की स्थिति

रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक शहरीकरण में एशिया का वर्चस्व है, जहाँ दुनिया के 10 में से 9 सबसे बड़े शहर और लगभग 60% मेगासिटी स्थित हैं। इसमें भारत एक प्रमुख योगदानकर्ता है। चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ-साथ भारत भी तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन युवा जनसंख्या, आंतरिक प्रवासन और सेवा व विनिर्माण क्षेत्रों के विस्तार के कारण भारत विशेष रूप से उभरकर सामने आता है। इससे वैश्विक शहरी अर्थव्यवस्था और श्रम बाज़ार में भारतीय शहरों की भूमिका और मजबूत हो रही है।

छोटे शहर: असली विकास इंजन

हालाँकि मेगासिटी अधिक चर्चा में रहते हैं, लेकिन UN रिपोर्ट के अनुसार वास्तविक शहरी वृद्धि छोटे और मध्यम शहरों में हो रही है। दुनिया के लगभग 96% शहरों की आबादी 10 लाख से कम है। भारत में भी ऐसे शहर बेहतर सड़क संपर्क, डिजिटल कनेक्टिविटी और उभरते स्थानीय उद्योगों के कारण तेज़ी से बढ़ रहे हैं। कोझिकोड जैसे शहर 50 लाख से अधिक आबादी के साथ तेज़ी से विकसित होते शहरी केंद्रों के उदाहरण हैं, जो यह दर्शाते हैं कि भारत का शहरी विकास अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रहा।

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vikash

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