भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे (IIT Bombay) ने वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनी हनीवेल (Honeywell) के साथ मिलकर मुंबई के पवई परिसर में सस्टेनेबिलिटी स्किल्स और इनोवेशन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) स्थापित करने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य उद्योग-शैक्षणिक सहयोग के माध्यम से वर्ष 2030 तक 1 लाख से अधिक छात्रों को सस्टेनेबिलिटी से जुड़े क्षेत्रों में प्रशिक्षण देना है। इस केंद्र का नाम IIT बॉम्बे हनीवेल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर फ्यूचर स्किल्स एंड इनोवेशन रखा जाएगा, जो हरित प्रौद्योगिकी, सतत विकास और उभरती तकनीकों में कौशल विकास तथा अनुसंधान को बढ़ावा देगा।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे में स्थापित होने वाला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) सस्टेनेबिलिटी, पर्यावरणीय प्रौद्योगिकी और हरित नवाचार से जुड़े उन्नत कौशल विकसित करने का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। इस पहल को हनीवेल होमटाउन सॉल्यूशंस इंडिया फाउंडेशन द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है, जो हनीवेल की भारत में परोपकारी शाखा है। यह केंद्र छात्रों को वैश्विक सस्टेनेबिलिटी चुनौतियों का समाधान करने के लिए आवश्यक व्यावहारिक ज्ञान और वास्तविक दुनिया के कौशल प्रदान करने पर विशेष ध्यान देगा।
IIT बॉम्बे और हनीवेल द्वारा स्थापित सस्टेनेबिलिटी सेंटर में प्रमाणपत्र आधारित कार्यक्रम (Certificate Programmes) चलाए जाएंगे, जो शैक्षणिक पाठ्यक्रम को वास्तविक परियोजनाओं के साथ जोड़ेंगे। ये कार्यक्रम भारत भर के स्नातक, स्नातकोत्तर और डॉक्टोरल छात्रों के लिए खुले होंगे। इन कार्यक्रमों के अंतर्गत छात्र व्यावहारिक सस्टेनेबिलिटी चुनौतियों पर कार्य करते हुए उद्योग उन्मुख प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इसके अलावा यह केंद्र उन्नत प्रयोगशाला अवसंरचना के विकास, आधुनिक उपकरणों की खरीद, पाठ्यक्रम विकास और शोध अनुदान को भी समर्थन प्रदान करेगा।
IIT बॉम्बे में स्थापित सस्टेनेबिलिटी स्किल्स के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का पाठ्यक्रम छात्रों को विकसित होती ग्रीन इकोनॉमी के लिए तैयार करने हेतु पाँच प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित होगा। इन प्रमुख शिक्षण क्षेत्रों का उद्देश्य छात्रों को पर्यावरणीय, आर्थिक और नीतिगत चुनौतियों को समझने तथा उनके समाधान विकसित करने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करना है।
पाँच प्रमुख लर्निंग ट्रैक इस प्रकार हैं:
IIT बॉम्बे और Honeywell की सस्टेनेबिलिटी पहल पहले पायलट चरण के साथ शुरू की जाएगी, जिसके बाद इसे बड़े स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम के रूप में विस्तारित किया जाएगा। पायलट चरण के पहले दो महीनों के दौरान इस केंद्र की आवश्यक अवसंरचना विकसित की जाएगी, विशेष पाठ्यक्रम मॉड्यूल तैयार किए जाएंगे और लगभग 250 छात्रों के प्रारंभिक समूह को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस चरण का उद्देश्य कार्यक्रम की रूपरेखा को मजबूत बनाना और आगे चलकर इसे बड़े पैमाने पर लागू करने की तैयारी करना है।
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