प्रख्यात भारतीय कलाकार हिम्मत शाह का निधन

प्रसिद्ध भारतीय कलाकार हिम्मत शाह, जो अपनी मूर्तियों और आधुनिक कला के लिए जाने जाते थे, का रविवार सुबह 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने जयपुर के शेल्बी अस्पताल में अंतिम सांस ली। दिल का दौरा पड़ने के कारण उनका निधन हुआ। हिम्मत शाह का मानना था कि हर सामग्री में जीवन होता है, और उन्होंने अपने करियर में विभिन्न कलात्मक रूपों के साथ प्रयोग किए। उनका जयपुर स्थित स्टूडियो पुरानी बोतलों, तारों और रस्सियों से भरा हुआ था, जिनसे वे अनोखी कलाकृतियां बनाते थे।

हिम्मत शाह की अनूठी कला शैली

हिम्मत शाह अपनी रचनात्मक और प्रयोगात्मक कला के लिए प्रसिद्ध थे। वे हर सामग्री को जीवन्त मानते थे और जलाए गए कागज, बेकार बोतलें और रस्सियों जैसी चीजों से कला रचते थे। उनके जयपुर स्टूडियो में रोजमर्रा की चीजों को सुंदर कलाकृतियों में बदलने की अद्भुत क्षमता थी।

‘ग्रुप 1890’ के सदस्य हिम्मत शाह

हिम्मत शाह ‘ग्रुप 1890’ के सदस्य थे, जो आधुनिकतावादी कलाकारों का एक प्रभावशाली लेकिन अल्पकालिक समूह था। उनका कला-सफर कई दशकों तक चला, और उनकी अनूठी शैली के कारण वे प्रसिद्ध हुए। वे खास तौर पर कांस्य सिराकृतियों, टेराकोटा और सिरेमिक में स्लिप-कास्टिंग तकनीक तथा प्लास्टर ऑफ पेरिस, रेत और चांदी की पत्तियों से बनी ‘सिल्वर पेंटिंग्स’ के लिए जाने जाते थे।

संघर्ष और दृढ़ संकल्प

हिम्मत शाह ने अपने जीवन में कई आर्थिक कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उन्होंने कभी अपने कला-सृजन से समझौता नहीं किया। किरण नादर म्यूजियम ऑफ आर्ट की निदेशक रूबीना करोडे ने उन्हें एक ऐसा कलाकार बताया जो हमेशा सीमाओं को लांघकर अपनी कला के माध्यम से खुद को बेखौफ अभिव्यक्त करते थे।

हिम्मत शाह: एक आध्यात्मिक कलाकार

कलाकार जगन्नाथ पांडा ने हिम्मत शाह को एक आध्यात्मिक विचारक के रूप में याद किया, जो मानते थे कि कला को सिर्फ देखने की बजाय अनुभव किया जाना चाहिए। उन्होंने पारंपरिक और आधुनिक कला के बीच एक संतुलन स्थापित करने की अपनी अनूठी शैली से सभी को प्रभावित किया।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

हिम्मत शाह का जन्म गुजरात के लोथल में एक जैन व्यापारी परिवार में हुआ था। उन्हें बचपन से ही इतिहास, मिट्टी के बर्तन और पुरातत्व में गहरी रुचि थी। उन्होंने किशोरावस्था में घर छोड़ दिया और अहमदाबाद के सीएन कलानिकेतन में रसिकलाल पारिख के मार्गदर्शन में अध्ययन किया। बाद में, उन्होंने मुंबई के सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट और बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय में भारत के महानतम कलाकारों से प्रशिक्षण प्राप्त किया।

हिम्मत शाह को मिले प्रमुख पुरस्कार और सम्मान

अपने शानदार करियर के दौरान हिम्मत शाह को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिनमें शामिल हैं:

  • ललित कला अकादमी राष्ट्रीय पुरस्कार (1956, 1962)
  • बॉम्बे आर्ट सोसाइटी पुरस्कार (1962)
  • जम्मू और कश्मीर विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक (1961)
  • साहित्य कला परिषद पुरस्कार (1988)
  • मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कालिदास सम्मान (2003)

हिम्मत शाह का निधन भारतीय कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनकी कलाकृतियां और रचनात्मकता हमेशा उनकी विरासत को जीवित रखेंगी।

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vikash

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