हिमालय में तेजी से पिघलती बर्फ: क्या गंगा-ब्रह्मपुत्र पर मंडरा रहा है संकट?

हिमालय अब खतरे में है। हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रही है। पहले ये धीरे-धीरे बपिघल रहे थे लेकिन अब ये दोगुनी रफ्तार से पिघल रहे हैं। ध्रुवीय क्षेत्रों के बाद हिमालय विश्व का तीसरा सबसे बड़ा बर्फ का भंडार है, जिसे ‘तीसरा ध्रुव’ भी कहा जाता है। सवाल बड़ा है यदि यही हाल रहा तो क्या गंगा और ब्रह्मपुत्र जैसी जीवनदायिनी नदियां भी सूख जाएंगी? क्या यह किसी आने वाले संकट का संकेत है? हालिया रिपोर्ट चेतावनी देती है।

यह केवल बर्फ नहीं पिघल रही। यह आने वाले जल संकट की नींव है। करोड़ों लोगों की जिंदगी इससे जुड़ी है। खेती, पानी, अर्थव्यवस्था सब दांव पर है। यह कोई दूर की बात नहीं। यह अभी हो रहा है। और तेजी से हो रहा है।

ग्लेशियर क्षेत्र का करीब 12% हिस्सा खत्म

रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से सिकुड़ रहे हैं। 1990 से 2020 के बीच ग्लेशियर क्षेत्र का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा खत्म हो चुका है। बर्फ का भंडार भी 9 प्रतिशत कम हो गया है। चिंता की बात यह है कि 21वीं सदी में बर्फ पिघलने की रफ्तार 20वीं सदी के मुकाबले लगभग दोगुनी हो गई है। खासकर 2010 के बाद यह गिरावट और तेज हो गई है। छोटे ग्लेशियर सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. कई तो पूरी तरह गायब होने की कगार पर हैं।

बेसिन में ग्लेशियरों का सबसे ज्यादा नुकसान

रिपोर्ट बताती है कि गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन में ग्लेशियरों का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। पिछले तीन दशकों में इन इलाकों में क्रमशः लगभग 21 प्रतिशत और 16 प्रतिशत तक ग्लेशियर क्षेत्र घटा है। ये वही नदियां हैं जिन पर भारत समेत कई देशों की बड़ी आबादी निर्भर है। यदि ग्लेशियर सिकुड़ते रहे, तो इन नदियों का जलस्तर भी प्रभावित होगा. खासकर सूखे मौसम में पानी की उपलब्धता घट सकती है।

हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में ज्यादा ग्लेशियर

हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में करीब 63,000 से ज्यादा ग्लेशियर हैं। ये ग्लेशियर सिर्फ बर्फ के पहाड़ नहीं हैं। ये प्राकृतिक जल भंडार हैं। गर्मियों में यही बर्फ पिघलकर नदियों को पानी देती है। लेकिन अब यह संतुलन बिगड़ रहा है। तापमान बढ़ रहा है। बारिश का पैटर्न बदल रहा है। 5500 मीटर से नीचे के ग्लेशियर सबसे ज्यादा तेजी से पिघल रहे हैं। वहीं, दक्षिण और पूर्व की ओर मुख वाले ग्लेशियर ज्यादा तेजी से खत्म हो रहे हैं क्योंकि उन्हें अधिक धूप मिलती है।

 

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

सुजीत कलकल और अभिमन्यु मंडवाल ने एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप 2026 में स्वर्ण पदक जीता

भारतीय पहलवानों ने एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप 2026 में ज़बरदस्त प्रदर्शन किया है। सुजीत कलकल और…

4 hours ago

हंगरी के PM विक्टर ओर्बन के 16 साल बाद सत्ता से बेदखल, विपक्ष को मिला निर्णायक बहुमत

हंगरी में चुनावी नतीजों में दिग्गज राष्ट्रवादी नेता विक्टर ओर्बन को करारी हार का सामना…

4 hours ago

अमरावती प्रोजेक्ट: विश्व बैंक ने जारी किए 340 मिलियन डॉलर

अमरावती के विकास कार्यों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से बड़ी आर्थिक सहायता मिल रही है।…

4 hours ago

भारत में वित्त वर्ष 2025-26 में पेटेंट आवेदनों में 30.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, भारत की इनोवेशन प्रणाली को एक बड़ा…

5 hours ago

सुप्रीम कोर्ट ने मतदान और चुनाव में भागीदारी के अधिकारों की कानूनी स्थिति स्पष्ट की

सर्वोच्च न्यायालय ने यह फैसला सुनाया है कि वोट देने और चुनाव लड़ने का अधिकार…

5 hours ago

भारतीय नौसेना 2026 के पहले कमांडर सम्मेलन के लिए वरिष्ठ नेतृत्व को आमंत्रित करेगी

भारत के समुद्री सुरक्षा ढांचे को मज़बूत करने के लिए, भारतीय नौसेना 2026 में 'कमांडर्स…

6 hours ago