अमेरिका में हाल ही में रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों के एक समूह ने कांग्रेस (अमेरिकी संसद) में एच-1बी वीजा कार्यक्रम को तीन साल के लिए स्थगित करने संबंधी विधेयक पेश किया है। रिपब्लिकन सांसदों का तर्क है कि इस कार्यक्रम का दुरुपयोग करके अमेरिकी कामगारों की जगह कम दाम में विदेशी कर्मी लाए जा रहे हैं। एरिजोना से सांसद एली क्रेन ने ‘एंड एच-1बी वीजा एब्यूज एक्ट ऑफ 2026’ पेश किया, जिसे सात अन्य रिपब्लिकन सांसदों ने भी समर्थन दिया है।
बता दें, विधेयक में एच-1बी कार्यक्रम में सुधारों का प्रस्ताव है, जिसमें वार्षिक सीमा को 65,000 से घटाकर 25,000 करना, न्यूनतम वेतन 2,00,000 अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष निर्धारित करना और एच-1बी वीजा धारकों को आश्रितों को अमेरिका लाने की अनुमति नहीं देना शामिल है।
कांग्रेस सदस्य ब्रायन बैबिन, ब्रैंडन गिल, वेस्ली हंट, कीथ सेल्फ (सभी टेक्सास से), एंडी ओगल्स (टेनेसी से), पॉल गोसर (एरिजोना से) और टॉम मैक्लिंटॉक (कैलिफोर्निया से) ने विधेयक के मूल सह-प्रायोजक के रूप में हस्ताक्षर किए हैं। अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियां विदेशी कर्मियों को नियुक्त करने के लिए बड़े पैमाने पर एच-1बी वीजा कार्यक्रम का उपयोग करती हैं। प्रौद्योगिकी क्षेत्र के कर्मचारियों और चिकित्सकों सहित भारतीय पेशेवर, एच-1बी वीजा धारकों के सबसे बड़े समूहों में से एक हैं।
एच-1बी वीजा कार्यक्रम अमेरिकी कंपनियों को विशेष व्यवसायों, खासकर प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में विदेशी कामगारों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। भारतीय नागरिक ऐतिहासिक रूप से इन वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी रहे हैं, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में उच्च-कुशल कार्यबल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह कार्यक्रम लंबे समय से वाशिंगटन में राजनीतिक बहस का मुद्दा रहा है। आलोचकों का तर्क है कि यह घरेलू वेतन को कम करता है, जबकि उद्योग समूह मानते हैं कि यह अहम कौशल की कमी को पूरा करता है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में नवाचार को बढ़ावा देता है।
इस विधेयक में H-1B वीजा सिस्टम को पूरी तरह बदलने के लिए कई सख्त नियम सुझाए गए हैं
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