भारत में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसी दिशा में गुजरात सरकार ने सतत शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘लेक एंड एयर वॉच’ पहल की शुरुआत की है। यह कार्यक्रम गुजरात अर्बन डेवलपमेंट मिशन के अंतर्गत लागू किया गया है और इसका मुख्य उद्देश्य शहरों में झीलों की स्थिति तथा वायु गुणवत्ता की रीयल-टाइम निगरानी करना है। राज्य के शहरी विकास एवं शहरी आवास विभाग द्वारा शुरू की गई यह पहल भारत के ‘विकसित भारत’ मिशन के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप पर्यावरण के अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार शहरों के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
गुजरात में शुरू की गई Lake and Air Watch पहल का उद्देश्य तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण के कारण उत्पन्न पर्यावरणीय समस्याओं से निपटना है। राज्य के अधिकारियों ने देखा है कि बढ़ती शहरी आबादी के कारण झीलों के पानी की गुणवत्ता में गिरावट आई है, भूजल रिचार्ज कम हुआ है और वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए यह परियोजना विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वित निगरानी प्रणाली विकसित करेगी। इस समन्वय से प्रशासन को पर्यावरणीय समस्याओं की जल्दी पहचान करने और समय पर सुधारात्मक कदम उठाने में मदद मिलेगी।
इस पहल का एक महत्वपूर्ण भाग शहरी क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों की स्थापना है। ये स्टेशन लगातार प्रदूषण के स्तर को मापेंगे और रीयल-टाइम Air Quality Index की जानकारी प्रदान करेंगे। यह प्रणाली राज्य के 17 नगर निगमों और 152 नगरपालिका क्षेत्रों में स्थापित की जाएगी, जिससे शहरों और कस्बों में व्यापक निगरानी सुनिश्चित होगी। यदि AQI सुरक्षित सीमा से अधिक हो जाता है, तो प्रणाली स्वतः अलर्ट जारी करेगी, ताकि प्रशासन तुरंत कार्रवाई कर सके।
इस पहल की एक और प्रमुख विशेषता शहरी झीलों की निगरानी के लिए सैटेलाइट तकनीक का उपयोग है। सैटेलाइट चित्रों की सहायता से अधिकारी झीलों के क्षेत्र का विश्लेषण, प्रदूषण स्तर का पता लगाना, कचरे के जमाव की पहचान और शैवाल (algae) की वृद्धि की निगरानी कर सकेंगे। इन पर्यावरणीय संकेतकों के विश्लेषण से झीलों के समग्र स्वास्थ्य का आकलन किया जा सकेगा और संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने हेतु अलर्ट जारी किए जा सकेंगे। यह प्रणाली जल प्रदूषण, गाद जमाव (siltation) और पानी की गुणवत्ता में गिरावट जैसी समस्याओं से निपटने में सहायक होगी।
इस पहल को लगभग ₹10 करोड़ के अनुमानित बजट के साथ लागू किया जाएगा। परियोजना के क्रियान्वयन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी गुजरात शहरी विकास मिशन (GUDM) की होगी। इस पहल के माध्यम से राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के साथ-साथ सतत शहरी विकास (Sustainable Urban Development) को भी बढ़ावा देना चाहती है।
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