समावेशी शिक्षा को समर्थन देने के लिए सरकार ने श्री अरबिंदो सोसाइटी के साथ साझेदारी की

दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) ने 7 जुलाई 2025 को नई दिल्ली में श्री अरबिंदो सोसाइटी (SAS) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य शिक्षकों और शिक्षा से जुड़े कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण और उपकरण प्रदान कर दिव्यांग बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देना है। यह पहल दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (RPwD), 2016 के उद्देश्यों को समर्थन देती है।

‘प्रोजेक्ट इनक्लूज़न’ के अंतर्गत समावेशी शिक्षा

यह MoU श्री अरबिंदो सोसाइटी की ‘रूपांतर’ पहल के अंतर्गत चलाए जाने वाले ‘प्रोजेक्ट इनक्लूज़न’ का हिस्सा है। इस परियोजना के तहत एक मोबाइल ऐप और वेबसाइट के माध्यम से शिक्षकों, स्कूल काउंसलरों और शिक्षा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा ताकि वे दिव्यांग बच्चों को सामान्य स्कूलों में बेहतर ढंग से सहयोग दे सकें।

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद प्रतिभागियों को ई-प्रमाण पत्र (e-certificates) दिए जाएंगे और उन्हें नई शिक्षण सामग्री और उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य कक्षाओं को अधिक सहज, समावेशी और सभी बच्चों के लिए अनुकूल बनाना है।

RPwD अधिनियम, 2016 का क्रियान्वयन

यह परियोजना विशेष रूप से RPwD अधिनियम, 2016 की धारा 16, 17 और 47 के प्रावधानों को लागू करने में सहायक होगी, जो दिव्यांग बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और समान शिक्षा प्रदान करने की बात करते हैं।

यह साझेदारी स्कूलों, शिक्षकों और पुनर्वास पेशेवरों को यह समझने में मदद करेगी कि कैसे दिव्यांग बच्चों को सामान्य शिक्षा व्यवस्था में सम्मिलित किया जाए।

दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच: लेह समावेश पहल

यह समझौता ‘लेह समावेश पहल (Leh Inclusion Initiative)’ जैसे विशेष कार्यक्रमों के माध्यम से दूर-दराज के क्षेत्रों में भी पहुंच बनाने की दिशा में एक प्रयास है, जिससे देश के सभी हिस्सों में समान अवसर सुनिश्चित किए जा सकें।

शोध और भविष्य की योजनाएं

श्री अरबिंदो सोसाइटी प्रशिक्षण के साथ-साथ शोध एवं विकास कार्य भी करेगी, ताकि समावेशी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया जा सके। इसमें नई शिक्षण विधियों का अध्ययन और उपयोगी शैक्षणिक सामग्री का निर्माण शामिल होगा।

यह परियोजना लंबे समय में शिक्षकों के लिए एक मजबूत सहायता प्रणाली तैयार करेगी और सुनिश्चित करेगी कि कोई भी बच्चा केवल दिव्यांगता के कारण पीछे न रह जाए

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vikash

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