दुनिया भर के टेनिस प्रेमी महान खिलाड़ी फ्रेड स्टोले के निधन पर शोक व्यक्त कर रहे हैं। 86 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, जिसकी पुष्टि टेनिस ऑस्ट्रेलिया ने गुरुवार को की। स्टोले को उनकी असाधारण खेल प्रतिभा और सम्मानित कमेंट्री के लिए याद किया जाता है। 1960 के दशक में ऑस्ट्रेलिया के स्वर्णिम टेनिस युग के महत्वपूर्ण सदस्य रहे स्टोले ने कोर्ट के अंदर और बाहर अपनी अमिट छाप छोड़ी।
फ्रेड स्टोले का जन्म सिडनी, ऑस्ट्रेलिया में हुआ था। वह जल्दी ही टेनिस की दुनिया में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में उभरे। 1.91 मीटर (6 फुट 3 इंच) लंबे स्टोले को उनके आक्रामक खेल और प्रतिस्पर्धात्मकता के कारण “फियरी फ्रेड” (Fiery Fred) के नाम से जाना जाता था।
स्टोले का ग्रैंड स्लैम एकल सफर हार और जीत के मिश्रण से भरा रहा। अपने पहले प्रमुख खिताब को जीतने से पहले, उन्होंने लगातार पाँच ग्रैंड स्लैम फाइनल गंवाए, जिनमें 1963, 1964 और 1965 के तीन लगातार विंबलडन फाइनल शामिल थे। उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी साथी ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी रॉय एमर्सन थे, जिन्होंने उन्हें चार बड़े फाइनल में हराया।
लेकिन 1965 में स्टोले की मेहनत रंग लाई जब उन्होंने फ्रेंच चैंपियनशिप में टोनी रोश को हराकर अपना पहला ग्रैंड स्लैम एकल खिताब जीता, भले ही क्ले कोर्ट उनकी पसंदीदा सतह नहीं थी। अगले साल, 1966 में, उन्होंने यू.एस. चैंपियनशिप (अब यू.एस. ओपन) में जॉन न्यूकॉम्ब को हराकर अपना दूसरा ग्रैंड स्लैम एकल खिताब जीता। विशेष बात यह थी कि स्टोले और न्यूकॉम्ब दोनों उस टूर्नामेंट में गैर-वरीयता प्राप्त खिलाड़ी थे। इस जीत के बाद, स्टोले ने विश्व में नंबर 1 रैंकिंग हासिल की और फिर पेशेवर टेनिस में कदम रखा।
स्टोले सिर्फ एकल में ही नहीं, बल्कि युगल और मिश्रित युगल में भी अविस्मरणीय खिलाड़ी थे। उन्होंने कुल 17 ग्रैंड स्लैम खिताब जीते:
पुरुष युगल: 10 ग्रैंड स्लैम खिताब (1962-1969)
मिश्रित युगल: 7 ग्रैंड स्लैम खिताब
फ्रेड स्टोले ने 1964, 1965 और 1966 में ऑस्ट्रेलिया को डेविस कप जिताने में अहम भूमिका निभाई। 1964 में क्लीवलैंड में अमेरिका के खिलाफ उन्होंने डेनिस राल्सटन को हराकर ऑस्ट्रेलिया की ऐतिहासिक जीत में योगदान दिया।
1965 के डेविस कप फाइनल में भी स्टोले ने शानदार प्रदर्शन किया और सिडनी में हुए मुकाबले में मैनोलो सांताना को पाँच सेटों के संघर्ष में हराकर ऑस्ट्रेलिया को खिताब दिलाने में मदद की।
1982 में प्रतिस्पर्धी टेनिस से संन्यास लेने के बाद, स्टोले ने सफलतापूर्वक कोचिंग और कमेंट्री की दुनिया में कदम रखा। उन्होंने विटास गेरुलाइटिस को कोचिंग दी, जिससे उन्हें 1977 ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब जीतने में मदद मिली।
स्टोले एक सम्मानित टेनिस कमेंटेटर भी बने और उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के नाइन नेटवर्क और अमेरिकी प्रसारकों के लिए काम किया। उनकी गहरी विश्लेषण क्षमता और टेनिस ज्ञान ने उन्हें दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया।
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