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वित्त मंत्री ने “आत्मनिर्भर भारत अभियान” के 5वें और आखिरी चरण के उपायों का किया ऐलान

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने COVID-19 महामारी के बीच प्रधानमंत्री द्वारा घोषित “आत्मनिर्भर भारत अभियान” के तहत आर्थिक राहत पैकेज की कड़ी में कुछ और राहत उपायों को जोड़ते हुए 5वें और आखिरी चरण के कदमों की जानकारी विस्तार से साझा करते हुए 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज के उपायों का समापन किया है। भारत को आत्मनिर्भर बनाने के मुख्य उद्देश्य से की गई यह घोषणा 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ही हिस्सा है, जिसका प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 12 मई को ऐलान किया गया था।


“आत्मनिर्भर भारत अभियान” के लिए आर्थिक राहत पैकेज के 5वें और आखिरी चरण के तहत किए जाने वाले उपायों से जुड़ी मुख्य विशेषताएं:-




1. मनरेगा के लिए 40,000 करोड़ रुपये का आवंटन:

  • भारत सरकार ने मनरेगा के तहत 40,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि आवंटित करने का निर्णय लिया है, जिससे लगभग कुल 300 करोड़ मानव दिवस का रोजगार पैदा करने में मदद मिलेगी.
  • इससे भारत सरकार मानसून के मौसम में वापस लौट रहे प्रवासियों समेत ज्यादा काम की जरूरत को संबोधित करेगी.
  • इससे बड़ी संख्या में टिकाऊ और जल संरक्षण संपदाओं सहित आजीविका संपदाएं निर्मित की जाएंगी.
  • इस तरह उच्च उत्पादन के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा.

2. स्वास्थ्य क्षेत्र:

  • भारत सरकार ने स्वास्थ्य पर सार्वजनिक व्यय बढ़ाने का फैसला किया है। इसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों को विकसित करने के लिए जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य संस्थानों का निवेश भी शामिल होगा.
भविष्य में किसी भी महामारी से निपटने के लिए भारत को तैयार रखने के लिए, निम्नलिखित उपाय किए जाएंगे:
  • सभी जिलों में संक्रामक रोगों के अस्पताल ब्लॉक.
  • भविष्य के महामारियों के प्रबंधन के लिए सभी जिलों और ब्लॉक स्तर के लैब और जन स्वास्थ्य इकाई में एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं द्वारा लैब नेटवर्क और निगरानी को मजबूत किया जाएगा.
  • आईएमसीआर द्वारा स्वास्थ्य के लिए राष्ट्रीय संस्थागत प्लेटफॉर्म, अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा.
  • राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन लागू किया जाएगा और राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य खाका भी तैयार किया जाएगा.

प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा प्रदान करने के लिए उठाए जाने वाले कदम:


भारत सरकार ने डिजिटल / ऑनलाइन शिक्षा तक बहु-माध्यम पहुंच के लिए तत्काल ‘पीएम ई-विद्या’ कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया है। इस कार्यक्रम में निम्नलिखित शामिल होंगे:

  • दीक्षा कार्यक्रम के जरिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में स्कूली शिक्षा के लिए “एक राष्ट्र, एक डिजिटल मंच” प्रदान किया जाएगा. इसमें सभी ग्रेड के लिए एनर्जेटिक टेक्स्टबुक्स की लॉन्चिंग भी करना शामिल होगा.
  • “वन क्लास, वन चैनल” की तर्ज पर 1 से 12 तक की सभी कक्षा के लिए एक टीवी चैनल लॉन्च किया जाएगा.
  • शिक्षा प्रदान करने के लिए रेडियो, सामुदायिक रेडियो और पॉडकास्ट का व्यापक उपयोग.
  • दृष्टिबाधित और श्रवण बाधित छात्रों के लिए विशेष ई-कंटेंट लॉन्च किया जाएगा.
  • शीर्ष 100 विश्वविद्यालयों को 30 मई, 2020 तक स्वचालित रूप से ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू करने की अनुमति देना.
  • मनोदर्पण’, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण के सिलसिले में छात्रों, शिक्षकों और परिवारों का मनोवैज्ञानिक-सामाजिक समर्थन करने के लिए एक पहल है जो तुरंत शुरू की जाएगी.
  • ‘स्कूल, शुरुआती बचपन और शिक्षकों के लिए नया राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचा भी शुरू किया जाएगा, जो वैश्विक और 21 वीं सदी की कौशल आवश्यकताओं के साथ एकीकृत होंगे।
  • साल 2025 तक प्रत्येक बच्चा कक्षा 5 में सीखने का स्तर और परिणाम प्राप्त सके यह सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय बुनियादी साक्षरता और गणना मिशन को दिसंबर 2020 तक शुरू किया जाएगा.

3. IBC से संबंधित उपाय:

  • भारत सरकार ने दिवाला कारवाई को शुरू करने के उद्देश्य से संहिता के तहत कोविड  19 से संबंधित ऋण को “डिफ़ॉल्ट” की परिभाषा से बाहर रखने का फैसला किया है.
  • महामारी की स्थिति के आधार पर, एक वर्ष तक नई दिवाला कारवाई की शुरुआत नहीं की जायेगी.
  • संहिता की धारा 240 ए के तहत MSMEs के लिए विशेष दिवाला संकल्प ढांचा जल्द ही अधिसूचित किया जाएगा.
  • इनसॉल्वेंसी की कार्यवाही शुरू करने की न्यूनतम सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी गई है ताकि बड़े पैमाने पर एमएसएमई को लाभ मिल सके.

4. कंपनी अधिनियम में चूक को अपराध की श्रेणी से बाहर करना:

  • भारत सरकार ने कंपनी अधिनियम के तहत की गयी गलती (चूक) को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का फैसला किया है, जिसमें सीएसआर रिपोर्टिंग में कमियां, बोर्ड रिपोर्ट में खामियां, चूक दर्ज करना, एजीएम रखने में देरी जैसी छोटी तकनीकी और प्रक्रियात्मक चूक शामिल हैं।
  • कंपाउंडेबल अपराधों के अधिकांश हिस्सों को आंतरिक सहायक तंत्र (internal adjudication mechanism) में स्थानांतरित कर दिया जाएगा और कंपाउंडिंग के लिए RD की शक्तियों को बढ़ाया जाएगा। इस तरह, अब पहले की तुलना में 58 अनुभाग को IAM के तहत निपटाया जाएगा।
  • उपरोक्त संशोधन से आपराधिक अदालतों और एनसेएलटी  के मामलों की संख्या में कमी आने की उम्मीद है।
  • 7 समझौता योग्य (कंपाउंडेबल) अपराधों को पूरी तरह से हटा दिया गया है और 5 अपराधों को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत निपटाया जायेगा.

5. कॉरपोरेट्स के लिए ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस के लिए किए जाने वाले महत्वपूर्ण सुधार हैं: 

  • स्वीकृत विदेशी बाजारों में भारतीय सार्वजनिक कंपनियों द्वारा प्रतिभूतियों का प्रत्यक्ष सूचीबद्ध होना.
  • निजी कंपनियां जो स्टॉक एक्सचेंजों पर एनसीडी को सूचीबद्ध करती हैं, उन्हें सूचीबद्ध कंपनियों के रूप में नहीं माना जाएगा.
  • कंपनी अधिनियम, 1956 के भाग  9 ए (निर्माता कंपनियों) के प्रावधानों को कंपनी अधिनियम, 2013 में शामिल करना.
  • NCLAT के लिए अतिरिक्त / विशिष्ट बेंच गठित करने की शक्ति
  • छोटी कंपनियों, एक-व्यक्ति के स्वामित्व वाली कंपनियों, निर्माता कंपनियों और स्टार्ट अप के द्वारा की गयी गलतियों के लिए आर्थिक दंड में कमी.
6. सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम नीति:


भारत सरकार एक नई सुसंगत नीति शुरू करेगी, जहां सभी क्षेत्र निजी क्षेत्र के लिए खुले होंगे जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम परिभाषित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
तदनुसार सरकार एक नई नीति की घोषणा करेगी जिसमें:
  • सार्वजनिक हित में सार्वजनिक उपक्रमों की अपेक्षा रखने वाले रणनीतिक क्षेत्रों की सूची को अधिसूचित किया जाएगा।
  • सामरिक क्षेत्रों में, कम से कम एक उद्यम सार्वजनिक क्षेत्र में रहेगा लेकिन निजी क्षेत्र को भी इजाजत दी जाएगी.
  • अन्‍य क्षेत्रों में, पीएसई का निजीकरण किया जाएगा (समय का निर्धारण व्‍यवहार्यता पर आधारित होगा।).
  • अनावश्‍यक प्रशा‍सनिक खर्च को कम करने के लिए, सामरिक क्षेत्रों में उद्यमों की संख्‍या आमतौर पर केवल एक से चार होगी; अन्‍य का निजीकरण/विलय कर दिया जाएगा/ होल्डिंग कम्‍पनियों के अंतर्गत लाया जाएगा.
7. राज्‍य सरकारों को सहायता:


केंद्र द्वारा राज्यों सरकारों को COVID-19 महामारी के इस कठिन समय में लगातार सहयोग दिया जा रहा है।
  • अप्रैल में 46,038 करोड़ रुपये के करों का भुगतान पूरी तरह से दिया गया था, हालांकि वास्तविक राजस्व बजट अनुमानों से अभूतपूर्व गिरावट को दर्शाता है
  • केंद्र की हालत खराब होने के बावजूद, 12,390 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान अप्रैल और मई के महीने तक में राज्यों को दिया गया.
  • अप्रैल के पहले सप्ताह में 11,092 करोड़ रुपये के एसडीआरएफ फंड जारी किए गए.
  • स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड रोधी गतिविधियों के लिए 4,113 करोड़ रुपये से अधिक जारी किए थे.
साथ ही, केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक से इनमे वृद्धि करने का अनुरोध किया है:
  • राज्यों की अग्रिम सीमा 60% बढ़ाने.
  • ओवरड्राफ्ट दिनों की संख्या राज्य 14 दिनों से 21 तक करने
  • दिनों की संख्या राज्य में एक तिमाही में 32 से 50 दिनों तक ओवरड्राफ्ट में हो सकती है
  • .

सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 3% पर आधारित राज्यों में 2020-21 के लिए शुद्ध उधार 6.41 लाख करोड़ रुपये है:
  • इस संकट को देखते हुए, केन्‍द्र ने केवल वर्ष 2020-21 के लिए राज्‍यों की उधार की सीमा 3% से बढ़ाकर 5% करने का फैसला किया है। इससे राज्‍यों को 4.28 लाख करोड़ रुपये के अतिरिक्‍त संसाधन मिल सकेंगे।
उधार का भाग विशिष्ट सुधारों (वित्त आयोग की सिफारिशों सहित) से जुड़ा होगा:
  • उच्चतर जीएसडीपी वृद्धि और कम घाटे के माध्यम से अतिरिक्त ऋण की स्थिरता सुनिश्चित करना.
  • प्रवासियों के कल्याण को बढ़ावा देना और खाद्य वितरण में रिसाव को कम करना
  • निवेश के माध्यम से रोजगार सृजन में वृद्धि
  • बिजली क्षेत्र को टिकाऊ बनाते हुए किसानों के हितों की रक्षा करना
  • शहरी विकास, स्वास्थ्य और स्वच्छता को बढ़ावा देना.
सुधारों को चार क्षेत्रों से जोड़ा जाएगा: ‘एक देश एक राशन कार्ड’ का सार्वभौमिकरण, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, बिजली वितरण और शहरी स्थानीय निकाय.


एक विशिष्ट योजना, व्यय विभाग द्वारा निम्नलिखित पैटर्न पर अधिसूचित की जाएगी:
  • 0.50 प्रतिशत की बिना शर्त वृद्धि
  • 0.25 प्रतिशत के 4 हिस्सों में 1 प्रतिशत, जिसमें प्रत्येक हिस्सा स्पष्ट रूप से निर्दिष्ट, मापने योग्य और व्यवहार्य सुधार कार्यों से जुड़ा हुआ हो
  • आगे 0.50 प्रतिशत और, अगर चार में से कम से कम तीन सुधार क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल कर लीजाएं.
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