हिमाचल प्रदेश में पलास बिल्ली का पहला फोटोग्राफिक साक्ष्य

हिमाचल प्रदेश में हाल ही में एक महत्वपूर्ण खोज हुई है, जिसमें पलास का बिल्ली (Otocolobus manul) की पहली फोटोशॉपिक साक्ष्य प्राप्त हुई हैं। यह चित्र किन्नौर क्षेत्र में बर्फीले तेंदुए के सर्वे के दौरान खींची गई थीं, जो भारत में इस दुर्लभ बिल्लियों की प्रजाति की उपस्थिति और वितरण पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं।

पलास का बिल्ली के बारे में

  • शारीरिक विशेषताएँ: पलास का बिल्ली एक छोटी, एकाकी बिल्ली है, जो अपने घने, चांदी जैसे भूरे फर, चपटी चेहरे और गोल कानों के लिए जानी जाती है। इनकी रात में सक्रिय और लुप्तप्राय प्रवृत्तियाँ इसे अध्ययन करने में चुनौतीपूर्ण बनाती हैं।
  • आवास और वितरण: पलास का बिल्ली मध्य एशिया का मूल निवासी है, जो 5,000 मीटर की ऊँचाई तक की चट्टानी steppe और ठंडी रेगिस्तानी इलाकों में पाई जाती है। इसकी ज्ञात सीमा में मंगोलिया, चीन, रूस, कजाखस्तान और ईरान के कुछ हिस्से शामिल हैं।
  • आहार: यह मुख्य रूप से छोटे स्तनधारियों जैसे वोल्स और पिकाओं, साथ ही पक्षियों और कीड़ों पर निर्भर रहती है।
  • संरक्षण स्थिति: IUCN रेड लिस्ट में इसे ‘कम चिंता’ के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, हालांकि पलास का बिल्ली आवास विनाश, शिकार और जलवायु परिवर्तन से खतरे का सामना कर रही है।

हाल की खोज का महत्व
हिमाचल प्रदेश से प्राप्त यह फोटोशॉपिक साक्ष्य न केवल पलास का बिल्ली की ज्ञात वितरण सीमा को बढ़ाते हैं, बल्कि यह हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की समृद्ध जैव विविधता को भी उजागर करते हैं। इस खोज से यह आवश्यकता रेखांकित होती है कि इस लुप्तप्राय प्रजाति और इसके आवास की सुरक्षा के लिए त्वरित संरक्षण प्रयासों की जरूरत है।

संरक्षण संदर्भ

  • आवास संरक्षण: 3,900–4,100 मीटर की ऊँचाई पर जहां पलास का बिल्ली पाई गई, वहां की चट्टानी आवासों की सुरक्षा करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • खतरे को कम करना: आवास विखंडन, अवैध वन्यजीव व्यापार और जलवायु परिवर्तन जैसे खतरों का समाधान करना इस प्रजाति के अस्तित्व के लिए आवश्यक है।
  • अनुसंधान और निगरानी: पलास का बिल्ली की वितरण, व्यवहार और पारिस्थितिकी को समझने के लिए लगातार अनुसंधान और निगरानी की आवश्यकता है, ताकि प्रभावी संरक्षण रणनीतियों को लागू किया जा सके।
श्रेणी मुख्य बिंदु
समाचार में क्यों – हिमाचल प्रदेश, भारत में पलास का बिल्ली पहली बार फोटोशॉपिक साक्ष्य के रूप में पाया गया।
प्रजाति – पलास का बिल्ली (Otocolobus manul), एक छोटी, एकाकी बिल्ली।
आवास – चट्टानी, उच्च-ऊँचाई वाले क्षेत्रों में पाई जाती है, 5,000 मीटर तक, मुख्य रूप से मध्य एशिया, मंगोलिया, चीन, रूस, कजाखस्तान और ईरान के कुछ हिस्सों में।
आहार – छोटे स्तनधारियों जैसे वोल्स और पिकाओं, पक्षियों और कीड़ों पर निर्भर रहती है।
संरक्षण स्थिति – IUCN रेड लिस्ट में कम चिंता के रूप में सूचीबद्ध।
शारीरिक विशेषताएँ – घने, चांदी जैसे भूरे फर, चपटी चेहरे और गोल कान।
हाल की खोज – हिमाचल प्रदेश के किन्नौर क्षेत्र में खींची गई तस्वीरें।
प्रजाति के लिए खतरे – आवास विनाश, शिकार और जलवायु परिवर्तन प्रमुख खतरे हैं।
वैज्ञानिक महत्व – इस खोज से पलास का बिल्ली की ज्ञात वितरण सीमा भारत में बढ़ी है।
अनुसंधान का क्षेत्र – पलास का बिल्ली के पारिस्थितिकी, व्यवहार और वितरण पर ongoing अध्ययन की आवश्यकता है।
खोज का क्षेत्र – किन्नौर क्षेत्र, हिमाचल प्रदेश।
सर्वे प्रकार – क्षेत्र में बर्फीले तेंदुए के सर्वे के दौरान यह खोज की गई।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

क्या भारत के ₹17.2 लाख करोड़ के उधार में बढ़ोतरी के बाद RBI दखल दे सकता है?

बजट FY27 में वित्तीय अनुशासन का संदेश देने के बावजूद बांड बाजार में दबाव के…

2 hours ago

अरुणाचल में ‘अग्नि परीक्षा’ अभ्यास के लिए सेना और ITBP का संयुक्त अभियान

हाल ही में अरुणाचल प्रदेश में आयोजित अभ्यास अग्नि परीक्षा ने खास ध्यान आकर्षित किया…

2 hours ago

आदमपुर हवाई अड्डे का नाम बदलकर श्री गुरु रविदास महाराज जी हवाई अड्डा रखा गया

पंजाब के विमानन मानचित्र में 02 फरवरी 2026 को एक महत्वपूर्ण और प्रतीकात्मक बदलाव देखने…

2 hours ago

केरल के कंथल्लूर में ऑर्किड की नई प्रजाति खोजी गई

भारत की जैव विविधता को एक बार फिर नई पहचान मिली है, जब वैज्ञानिकों ने…

3 hours ago

सर्वेश रंजन बने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के नए चीफ जनरल मैनेजर

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने नेतृत्व स्तर पर एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है।…

3 hours ago

नई दिल्ली में फ्यूचर वॉरफेयर कोर्स का तीसरा एडिशन लॉन्च

भारत ने औपचारिक रूप से भविष्य के युद्धों के लिए अपने सैन्य नेतृत्व को तैयार…

3 hours ago