भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने इस सप्ताह गिनी की खाड़ी में अपना पहला संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किया। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह अभ्यास समुद्री सुरक्षा पर यूरोपीय संघ-भारत के बीच सहयोग और समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (यूएनसीएलओएस) के लिए दृढ़ संकल्प का संकेत है।
नौसैनिक समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से 24 अक्टूबर को यह अभ्यास किया गया। इस अभ्यास के दौरान भारतीय नौसेना का गश्ती पोत आइएनएस सुमेधा, यूरोपीय संघ के तीन सदस्य देशों के पोतों के साथ शामिल हुआ।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि अभ्यास समुद्री सुरक्षा पर यूरोपीय संघ-भारत सहयोग की व्यापकता और गतिशीलता को दर्शाता है तथा समुद्री कानून पर संयुक्त राष्ट्र संधि (यूएनसीएलओएस) के लिए दृढ़ संकल्प का संकेत देता है। मंत्रालय ने कहा कि अभ्यास का उद्देश्य क्षेत्र के समर्थन में नौसैन्य समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना था।
इतालवी नौसेना के पोत आइटीएस फास्करी, फ्रांसीसी नौसेना के पोत एफएस वेंटोज और स्पेनिश नौसेना के पोत टारनेडो ने ईयू का प्रतिनिधित्व किया। इन चार पोतों ने घाना के तट से दूर गिनी की खाड़ी में सामरिक युद्धाभ्यास किया। इसमें बोर्डिंग अभ्यास, फ्रांसीसी पोत वेंटोस और भारतीय नौसेना के पोत सुमेधा के हेलीकाप्टरों का उपयोग करके उड़ान अभ्यास और पोतों के बीच कर्मियों का स्थानांतरण शामिल था।
अभ्यास के बाद अकरा, घाना में नालेज शेयरिंग सेशन ( ज्ञान साझाकरण सत्र) आयोजित किया गया। इस सत्र ने घाना के अधिकारियों और घाना में भारतीय, ईयू और ईयू के सदस्य देशों के मिशनों के प्रतिनिधियों के बीच संबंधों को मजबूत करने में मदद मिली। इन गतिविधियों ने गिनी की खाड़ी में समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में भारत और ईयू की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
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