भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की निगरानी को-ऑपरेटिव बैंकों पर और अधिक सशक्त बनाने के लिए बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2020 लागू किया गया। इस अधिनियम के माध्यम से आरबीआई को प्रबंधन, ऑडिट, पूंजी आवश्यकताओं और बैंक पुनर्गठन में अतिरिक्त शक्तियाँ प्रदान की गईं। 26 जून 2020 से प्रभावी ये संशोधन, शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) पर लागू किए गए, जिससे उनकी वित्तीय स्थिरता और जमाकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इसके अतिरिक्त, आरबीआई के 2024 मास्टर डायरेक्शन ऑन फ्रॉड मैनेजमेंट ने को-ऑपरेटिव बैंकों में धोखाधड़ी की रोकथाम, प्रारंभिक चेतावनी तंत्र और प्रशासनिक सुधारों के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं।
सहकारी बैंकों में सुशासन को बढ़ावा देने के लिए बहु-राज्य सहकारी समितियां (MSCS) अधिनियम, 2002 में भी संशोधन किया गया, जिसमें 97वें संविधान संशोधन को शामिल किया गया। साथ ही, सहकारी लोकपाल (Co-operative Ombudsman) और सहकारी चुनाव प्राधिकरण (Co-operative Election Authority) की स्थापना की गई, जिससे पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित किए जा सकें।
आरबीआई की कड़ी निगरानी के प्रमुख बिंदु
बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2020
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आरबीआई को को-ऑपरेटिव बैंकों के प्रबंधन और प्रशासन पर अतिरिक्त नियंत्रण दिया गया।
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शासन, ऑडिट और पूंजी आवश्यकताओं को मजबूत करने के लिए अधिनियम की धारा 10, 10A, 10B, 35B, 36AB को लागू किया गया।
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सहकारी बैंकों के पुनर्गठन और जमाकर्ताओं की सुरक्षा के लिए नए प्रावधान जोड़े गए।
आरबीआई का 2024 मास्टर डायरेक्शन ऑन फ्रॉड मैनेजमेंट
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धोखाधड़ी रोकने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली लागू।
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स्टाफ जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त नियम।
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बाहरी लेखा परीक्षकों और सेवा प्रदाताओं की जवाबदेही तय।
प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) फ्रेमवर्क
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कमजोर वित्तीय स्थिति वाले शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) की पहचान और सुधार के लिए लागू।
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जमाकर्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी।
डिपॉज़िट इंश्योरेंस (DICGC) के तहत सुरक्षा
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सहकारी बैंकों में जमाकर्ताओं की राशि को बैंक विफलता के मामलों में सुरक्षित करने के लिए डिपॉज़िट इंश्योरेंस और क्रेडिट गारंटी निगम (DICGC) की कवरेज।
“आरबीआई कहता है” जागरूकता अभियान
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जनता को बैंक धोखाधड़ी, उनके तरीकों और सुरक्षा उपायों की जानकारी प्रदान करना।
बहु-राज्य सहकारी समितियां (MSCS) अधिनियम, 2002 में संशोधन
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97वें संविधान संशोधन के प्रावधान शामिल कर सहकारी समितियों के प्रशासन को पारदर्शी बनाया गया।
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चुनावी प्रक्रिया में सुधार और वित्तीय प्रकटीकरण को अधिक पारदर्शी बनाया गया।
सहकारी लोकपाल (Co-operative Ombudsman) की स्थापना
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धारा 85A के तहत बहु-राज्य सहकारी समितियों में पारदर्शिता लाने के लिए लोकपाल की नियुक्ति।
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जमाकर्ताओं और सदस्यों की शिकायतों का निवारण।
सहकारी चुनाव प्राधिकरण (Co-operative Election Authority) की स्थापना
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निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए नई संस्था बनाई गई।
नाबार्ड (NABARD) की धोखाधड़ी रोकथाम और रिपोर्टिंग में भूमिका
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बैंकों के लिए धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग अनिवार्य।
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राज्य पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और सीआईडी के माध्यम से धोखाधड़ी मामलों की जाँच को सुदृढ़ किया गया।
सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Cooperation) की भूमिका
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“सहकार से समृद्धि” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नीतियों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को लागू किया।
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सहकारी समितियों को स्थानीय स्तर तक विस्तारित करने का प्रयास।
निष्कर्ष
आरबीआई द्वारा सहकारी बैंकों के सुशासन और वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने के लिए उठाए गए ये कदम जमाकर्ताओं की सुरक्षा, पारदर्शिता और धोखाधड़ी रोकथाम की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। बैंकिंग विनियमन अधिनियम 2020, नाबार्ड के दिशानिर्देश, और सहकारी चुनाव प्राधिकरण जैसे सुधारों से भारत में सहकारी बैंकिंग प्रणाली अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बन रही है।
क्यों चर्चा में है? | सहकारी बैंकों पर आरबीआई की निगरानी मजबूत |
सुधार क्षेत्र | मुख्य विशेषताएँ |
बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2020 | आरबीआई का सहकारी बैंकों पर नियंत्रण सुदृढ़; बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की प्रमुख प्रशासनिक धाराएँ शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) पर लागू। |
आरबीआई का 2024 मास्टर डायरेक्शन ऑन फ्रॉड मैनेजमेंट | धोखाधड़ी की पहचान और जवाबदेही बढ़ाने के लिए नए नियम; प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और प्रशासनिक सुधार लागू। |
प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) फ्रेमवर्क | वित्तीय रूप से कमजोर UCBs को सुधारात्मक उपाय अपनाने के लिए अनिवार्य किया गया, जिससे जमाकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। |
डिपॉज़िट इंश्योरेंस (DICGC) | सहकारी बैंकों की विफलता की स्थिति में जमाकर्ताओं के लिए वित्तीय सुरक्षा कवच प्रदान करता है। |
जन जागरूकता अभियान (“आरबीआई कहता है“) | बैंक धोखाधड़ी, सुरक्षा उपायों और जमाकर्ता संरक्षण के बारे में लोगों को शिक्षित करने के लिए अभियान। |
बहु–राज्य सहकारी समितियां (MSCS) अधिनियम, 2002 संशोधन | पारदर्शिता, सुशासन और जवाबदेही को मजबूत करता है। |
सहकारी लोकपाल (धारा 85A, MSCS अधिनियम, 2002) | बहु-राज्य सहकारी समितियों (MSCS) के सदस्यों की वित्तीय शिकायतों और अधिकार हनन से जुड़े मामलों का निपटारा करता है। |
सहकारी चुनाव प्राधिकरण | बहु-राज्य सहकारी समितियों में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करता है। |
नाबार्ड के धोखाधड़ी रिपोर्टिंग दिशानिर्देश | बैंकों को धोखाधड़ी की रिपोर्ट राज्य पुलिस, सीआईडी, आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपने के लिए अनिवार्य किया गया। |
सहकारिता मंत्रालय (MoC) की भूमिका | सहकारी समितियों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने, सहकारी आधारित आर्थिक मॉडल को बढ़ावा देने और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करने पर कार्यरत। |