8 जनवरी को मनाया जाने वाला पृथ्वी का घूर्णन दिवस (Earth’s Rotation Day), 1851 में फ्रांसीसी भौतिक विज्ञानी लियोन फूको (Léon Foucault) द्वारा किए गए ऐतिहासिक प्रयोग की याद दिलाता है, जिसने पृथ्वी के घूर्णन को प्रमाणित किया। फूको ने एक पेंडुलम का उपयोग करके पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने की पुष्टि की, जिससे वैज्ञानिक दृष्टिकोण में क्रांति आ गई। यह दिवस विशेष रूप से बच्चों में वैज्ञानिक जिज्ञासा को बढ़ावा देने और पृथ्वी की गतिशीलता को समझने के प्रति जागरूकता फैलाने पर जोर देता है।
| सारांश/स्थिर जानकारी | विवरण |
| क्यों समाचार में? | पृथ्वी का घूर्णन दिवस 2025 |
| मुख्य ऐतिहासिक व्यक्ति | लियोन फूको |
| महत्व | पृथ्वी के घूर्णन को प्रमाणित करता है; वैज्ञानिक जिज्ञासा को प्रोत्साहित करता है |
| मुख्य प्रयोग | फूको पेंडुलम (1851) |
| पृथ्वी के आयाम | व्यास: 12,714 किमी (ध्रुवों से); 12,756 किमी (भूमध्य रेखा से) |
| सतह की संरचना | 70% पानी; 97% खारा पानी, 3% मीठा पानी |
| ग्रह की आयु | ~4.5 अरब वर्ष |
| हाल का हिमयुग | 70,000–11,500 वर्ष पहले |
| चुंबकीय क्षेत्र | पिघले हुए लोहे के कोर से उत्पन्न; सौर विकिरण से सुरक्षा प्रदान करता है |
| नासा की खोजें | जलवायु परिवर्तन घूर्णन को प्रभावित करता है; ध्रुवीय गति और दिनों की लंबाई में वृद्धि |
| कोरिओलिस प्रभाव | वायु धाराओं को मोड़ता है, व्यापारिक और पछुआ हवाओं को प्रभावित करता है |
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