प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के रक्षा वैज्ञानिकों द्वारा अग्नि-5 के परीक्षण पर बधाई दी है। यह मिसाइल प्रणाली एमआईआरवी(मल्टीपल इंडीपेंट रीएंट्री व्हीकल) तकनीक पर आधारित है। यह नई क्षमता हथियार प्रणाली को सैकड़ों किलोमीटर तक फैले विभिन्न लक्ष्यों के खिलाफ कई परमाणु हथियार पहुंचाने की अनुमति देती है, जिससे भारत की रणनीतिक निवारक क्षमता में और वृद्धि होती है।
अग्नि-5 मिसाइल का कार्यक्रम 2008 से आरंभ है। इस श्रेणी की मिसाइल प्रणाली भारतीय सेना में शामिल भी हो चुकी है। इसकी मारक क्षमता 5000 किमी से अधिक है और इसकी जद में चीन और आधा यूरोप भी आता है।
परीक्षण, जिसका कोडनेम “मिशन दिव्यास्त्र” (दिव्य हथियार) है, भारत को संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, रूस और चीन सहित एमआईआरवी मिसाइल सिस्टम को तैनात करने की क्षमता रखने वाले देशों की एक विशेष लीग में शामिल करता है।
पिछले हफ्ते, भारत ने बंगाल की खाड़ी और पूर्वी हिंद महासागर क्षेत्र के ऊपर नो-फ्लाई ज़ोन के लिए एक नोटिस जारी किया था, जो लंबी दूरी की मिसाइल परीक्षण करने के देश के इरादे को दर्शाता है।
मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (एमआईआरवी) उस तकनीक को कहते है जिसमें किसी मिसाइल में एक ही बार में एक से ज्यादा परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता होती है। जिससे आप दुश्मन के अलग-अलग लक्ष्यों को भेदा जा सकता है।
अग्नि 5 मिसाइल अग्नि सीरीज की 5000 किलोमीटर से अधिक की मारक क्षमता वाली सबसे लंबी दूरी की मिसाइल है। अग्नि 5 मिसाइल देश की दीर्घकालिक सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए विकसित किया गया है। यह मिसाइल चीन के सबसे उत्तरी हिस्से के साथ-साथ यूरोप के कुछ क्षेत्रों सहित लगभग पूरे एशिया को अपनी मारक क्षमता के अंतर्गत ला सकती है। अग्नि 1 से 4 तक के मिसाइलों की मारक क्षमता 700 किमी से 3,500 किमी तक है और इन्हें पहले ही तैनात किया जा चुका है। भारत पृथ्वी की वायुमंडलीय सीमा के अंदर और बाहर शत्रुतापूर्ण बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने की क्षमता विकसित कर रहा है।
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