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DRDO ने SFDR तकनीक का सफलतापूर्वक परीक्षण किया

 

DRDO ने SFDR तकनीक का सफलतापूर्वक परीक्षण किया |_50.1

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (Defence Research and Development Organisation-DRDO) ने ओडिशा तट से दूर एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR), चांदीपुर से सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (Solid Fuel Ducted Ramjet-SFDR) तकनीक का सफल उड़ान परीक्षण किया. SFDR तकनीक DRDO को लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल (air-to-air missiles-AAM) विकसित करने में तकनीकी मदद करेगी. DRDO ने 2017 में पहले SFDR विकसित करना शुरू किया तथा 2018 और 2019 में भी सफल परीक्षण किए.

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SFDR के बारे में:

  • SFDR एक मिसाइल प्रणोदन प्रणाली है जिसे मुख्य रूप से हैदराबाद में रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला (Defence Research and Development Laboratory-DRDL) और अनुसंधान केंद्र इमारत (Research Centre Imarat-RCI) द्वारा विकसित किया जा रहा है.
  • उच्च उर्जा पदार्थ अनुसंधान प्रयोगशाला (High Energy Material Research Laboratory-HEMRL) ने नोजल-लेस बूस्टर विकसित किया है, जबकि रैमजेट इंजन को रूसी सहायता से विकसित किया जा रहा है.
  • ITR द्वारा तैनात इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल, रैडार और टेलीमेट्री उपकरणों द्वारा कैप्चर किए गए डेटा का उपयोग करके मिसाइल के प्रदर्शन की निगरानी की गई और मिशन के उद्देश्यों के सफल प्रदर्शन की पुष्टि की.

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण टेकअवे:

  • रक्षा अनुसंधान और विकास विभाग के सचिव और अध्यक्ष DRDO: डॉ. जी सतीश रेड्डी.
  • DRDO का मुख्यालय: नई दिल्ली.
  • DRDO की स्थापना: 1958.

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