भारत के रक्षा अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र ने अत्यंत कठिन और दूरदराज़ परिस्थितियों में तैनात सैनिकों के समर्थन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने एक पोर्टेबल और हाथ से संचालित जल शुद्धिकरण प्रणाली विकसित की है, जो खारे पानी को सुरक्षित पेयजल में बदल सकती है। यह प्रणाली जल-अभाव वाले क्षेत्रों में लंबे गश्त और तैनाती के दौरान सैनिकों को भरोसेमंद जल आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने दूरस्थ, तटीय और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में तैनात सैनिकों की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हाथ से संचालित सी वाटर डीसैलीनेशन सिस्टम (SWaDeS) विकसित किया है।
यह जल शुद्धिकरण उपकरण सी वाटर डीसैलीनेशन सिस्टम (SWaDeS) कहलाता है। इसे डिफेंस लैबोरेटरी, जोधपुर द्वारा विकसित किया गया है। यह प्रणाली मैन्युअल रूप से या इंजन की सहायता से संचालित की जा सकती है। इसका उद्देश्य खारे पानी को शुद्ध कर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है। यह हल्की, पोर्टेबल और फील्ड परिस्थितियों के अनुकूल डिज़ाइन की गई है।
SWaDeS का उपयोग नौसेना अभियानों और तटीय प्रतिष्ठानों में किया जा सकता है। इसे लद्दाख के पैंगोंग त्सो जैसे आंतरिक खारे जल क्षेत्रों में भी तैनात किया जा सकता है। यह उन क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जहाँ मीठे पानी की उपलब्धता सीमित है। सीमावर्ती और दुर्गम इलाकों में तैनात सैनिकों के लिए यह प्रणाली आत्मनिर्भरता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।
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