अर्थशास्त्री डॉ बिमल जालान ने “फ्रॉम डिपेंडेंस टू सेल्फरिलायंस: मैपिंग इंडियाज राइज एज़ ए ग्लोबल सुपरपावर” पुस्तक लिखी है, जो बिमल जालान की गहरी अंतर्दृष्टि से भारत के विकास पथ लाभों का एक स्टॉकटेकिंग है। पुस्तक सामान्य पाठक को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट रूप से लिखी गई है। बिमल जालान ने अपनी पुस्तक को 3 भागों में विभाजित किया है: अर्थव्यवस्था पर 4 अध्याय, और शासन और राजनीति पर 3-3 अध्याय। बिमल जालान द्वारा साझा किया गया प्राथमिक ध्यान भारत के राष्ट्रीय हितों को बढ़ावा देना है, चाहे चुनाव के दौरान किसी भी पार्टी के राजनीतिक एजेंडे की घोषणा की गई हो।
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