सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के बाद ट्रंप ने 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा की

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को ट्रंप के नए टैरिफ को रद्द (Trump Tariff) कर दिया। इसके बाद ट्रंप ने मौजूदा इंपोर्ट ड्यूटी के ऊपर 10 परसेंट ग्लोबल टैरिफ ऑर्डर पर साइन किए। यह ऑर्डर करीब 5 महीने के लिए है, जिससे यूनाइटेड स्टेट्स के सुप्रीम कोर्ट से झटका लगने के बावजूद उनकी ट्रेड पॉलिसी में बढ़ोतरी का संकेत मिलता है। यह नया टैरिफ कब से लागू होगा कि इसकी नई तारीख भी सामने आ गई है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने जो टैरिफ दुनिया के अलग-अलग देशों पर लगाए थे वो सब रद्द हो गए हैं। इससे पहले जो टैरिफ लगा करते थे वही टैरिफ लगेंगे। यानी ट्रंप के आने के पहले जो टैरिफ व्यवस्था थी, वही लागू होगा। भारत पर पहले 3 से 4 फीसदी का टैरिफ लगता था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने 10% वैश्विक टैरिफ क्यों घोषित किया?

  • सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से कहा कि राष्ट्रपति को IEEPA के तहत व्यापक वैश्विक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है।
  • यह फैसला 20 फरवरी 2026 को सुनाया गया।
  • फैसले की आलोचना करने के बाद ट्रंप ने Trade Act of 1974 की धारा 122 का सहारा लिया।
  • इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति 150 दिनों के लिए अधिकतम 15% तक अस्थायी टैरिफ लगा सकते हैं, यदि भुगतान संतुलन (Balance of Payments) या व्यापार घाटे की समस्या हो।
  • इसी कानून का उपयोग करते हुए ट्रंप ने सभी आयातों पर बिना भेदभाव के 10% टैरिफ लगाने की घोषणा की।
  • 150 दिनों से अधिक विस्तार के लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी।

10% अमेरिकी आयात टैरिफ का क्या अर्थ है?

2026 का यह नया आयात टैरिफ मतलब है कि अमेरिका में आने वाले सभी सामानों पर अतिरिक्त 10% कर लगेगा। यह पहले से लागू टैरिफ के अतिरिक्त होगा, जैसे—

  • Section 232 टैरिफ (राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर)
  • Section 301 टैरिफ (अनुचित व्यापार प्रथाओं के आधार पर)

इससे अमेरिकी बाजार में आयातित वस्तुएँ महंगी हो जाएँगी।

  • अमेरिकी उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।
  • निर्यातक देशों की प्रतिस्पर्धात्मकता घट सकती है।
  • यदि अन्य देश जवाबी टैरिफ लगाते हैं, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है।

भारत पर प्रभाव: कौन-कौन से क्षेत्र प्रभावित होंगे?

10% वैश्विक टैरिफ का असर भारतीय निर्यात पर भी पड़ेगा। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि भारत को कोई विशेष छूट नहीं मिलेगी।

प्रभावित होने वाले प्रमुख क्षेत्र—

  • वस्त्र और परिधान
  • इस्पात और धातु उत्पाद
  • इंजीनियरिंग सामान
  • ऑटो कंपोनेंट्स

पहले भी भारत पर अमेरिकी व्यापारिक उपायों के तहत 50% तक टैरिफ लगाया गया था, जिसे वार्ता के बाद लगभग 18% तक कम किया गया। अब नया 10% टैरिफ अतिरिक्त लागत दबाव पैदा करेगा। यदि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो जाते हैं, तो निर्यात मांग घट सकती है, जिससे विनिर्माण और रोजगार पर असर पड़ सकता है।

व्यापक वैश्विक प्रभाव

  • यह कदम चीन, यूरोपीय संघ और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की ओर से जवाबी कार्रवाई को जन्म दे सकता है।
  • व्यापार युद्ध वैश्विक आर्थिक वृद्धि को धीमा कर सकते हैं और वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा सकते हैं।
  • अमेरिका पर निर्भर विकासशील देशों की मुद्रा पर दबाव बढ़ सकता है और व्यापार घाटा चौड़ा हो सकता है।

भारत के लिए यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब वह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण और मजबूत व्यापारिक साझेदारी की दिशा में प्रयास कर रहा है। यह कदम भारत को “मेक इन इंडिया” जैसे अभियानों के तहत घरेलू विनिर्माण को और तेज़ी से बढ़ावा देने के लिए प्रेरित कर सकता है।

मुख्य तथ्य (Static Facts)

  • घोषित टैरिफ: सभी आयात पर 10%
  • उपयोग किया गया कानूनी प्रावधान: Trade Act of 1974 की धारा 122
  • अधिकतम सीमा (धारा 122 के तहत): 150 दिनों के लिए 15%
  • सुप्रीम कोर्ट का फैसला: 20 फरवरी 2026
  • टैरिफ लागू होने की तिथि: 25 फरवरी 2026
  • पहले चुनौती दी गई कानूनी आधार: IEEPA
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vikash

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