दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया के बढ़ते दुरुपयोग पर सख्ती करते हुए ‘ऑपरेशन शस्त्र’ नामक एक बड़े शहरव्यापी अभियान की शुरुआत की है। 7 फरवरी 2026 को घोषित इस अभियान का उद्देश्य सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ तस्वीरें पोस्ट करने, गाली-गलौज करने और आपराधिक दबदबा दिखाकर डर फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना है। पुलिस के अनुसार, इस तरह का ऑनलाइन व्यवहार अक्सर वास्तविक जीवन में कानून-व्यवस्था की समस्याओं को जन्म देता है। ऑपरेशन शस्त्र का मकसद जनता का भरोसा बहाल करना और यह स्पष्ट संदेश देना है कि डिजिटल धमकियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया का इस्तेमाल तेजी से आपराधिक ताकत दिखाने और आम लोगों में मानसिक डर पैदा करने के लिए किया जा रहा है। दक्षिणी रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त एस. के. जैन ने कहा कि ऐसे लोगों पर खास ध्यान दिया जा रहा है जो ऑनलाइन पोस्ट के जरिए दबदबा बनाने या प्रतिद्वंद्वियों को डराने की कोशिश करते हैं। भले ही यह गतिविधियां डिजिटल हों, लेकिन कई बार ये वास्तविक हिंसा में बदल जाती हैं। ऑपरेशन शस्त्र को अपराध होने से पहले ही उसे रोकने के लिए एक निवारक कदम के रूप में शुरू किया गया है।
ऑपरेशन शस्त्र का मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया के माध्यम से डर फैलाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाना है। आग्नेयास्त्रों, धारदार हथियारों के साथ तस्वीरें या धमकी भरे कैप्शन पोस्ट करना असुरक्षा का माहौल बनाता है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस तरह का ऑनलाइन व्यवहार गैंग प्रतिद्वंद्विता को भड़का सकता है और संवेदनशील युवाओं को गलत दिशा में प्रभावित कर सकता है। शुरुआती स्तर पर ऐसे प्रोफाइल की पहचान कर कार्रवाई करके दिल्ली पुलिस ऑनलाइन धमकियों और ऑफलाइन अपराधों के बीच के संबंध को तोड़ना चाहती है।
ऑपरेशन शस्त्र के तहत दिल्ली भर में पुलिस संसाधनों की व्यापक तैनाती की गई। 500 से अधिक पुलिस टीमों और 2,000 से ज्यादा कर्मियों को एक साथ लगाया गया। इस समन्वित कार्रवाई से संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी, सत्यापन और त्वरित कार्रवाई संभव हो सकी। यह दिखाता है कि आधुनिक पुलिसिंग में अब साइबर निगरानी और जमीनी कार्रवाई का एकीकरण हो चुका है, जिससे कानून-व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।
इस अभियान के दौरान दिल्ली पुलिस ने 6,000 से अधिक सोशल मीडिया प्रोफाइल की जांच की। पुख्ता सबूत मिलने पर भारतीय दंड संहिता और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत 61 एफआईआर दर्ज की गईं। इसके बाद 83 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया कि निर्दोष लोगों को परेशान न किया जाए, इसके लिए हर मामले में उचित सत्यापन के बाद ही कार्रवाई की गई।
वरिष्ठ अधिकारियों ने ऑपरेशन शस्त्र को व्यापक निवारक पुलिसिंग रणनीति का हिस्सा बताया। साइबर निगरानी और पारंपरिक पुलिसिंग के एकीकरण से पुलिस को यह क्षमता मिलती है कि वह ऑनलाइन धमकियों के सड़क अपराध में बदलने से पहले ही कार्रवाई कर सके। यह दृष्टिकोण कानून-व्यवस्था में बदलाव को दर्शाता है, जहां डिजिटल व्यवहार को संभावित अपराध का शुरुआती संकेत माना जा रहा है। ऐसे निवारक अभियानों का उद्देश्य अपराध कम करना और सार्वजनिक सुरक्षा को पहले से मजबूत करना है।
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