रक्षा मंत्रालय ने कार्बाइन और टॉरपीडो के लिए ₹4,666 करोड़ के अनुबंधों पर किए हस्ताक्षर

भारत अपनी सुरक्षा से जुड़ी बदलती आवश्यकताओं के अनुसार सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण करता रहा है। इस दिशा में रक्षा मंत्रालय ने ₹4,666 करोड़ के रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते पैदल सेना के हथियारों और नौसेना की पनडुब्बी युद्ध प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। इससे सैनिकों की लड़ाई की क्षमता और पनडुब्बी हमले की क्षमता दोनों में सुधार होता है।

खबरों में क्यों?

रक्षा मंत्रालय ने नौसेना के लिए नए पैदल सेना हथियारों और उन्नत टॉरपीडो खरीदने के लिए ₹4,666 करोड़ के रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य सैनिक स्तर पर युद्ध की क्षमता को बढ़ाना और भारत की जलमग्न तथा पनडुब्बी युद्ध क्षमताओं को मजबूत करना है।

डील के बारे में

  • रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में नई दिल्ली में अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए।
  • इनमें सेना और नौसेना के लिए सीक्यूबी कार्बाइन और पनडुब्बियों के लिए भारी वजन वाले टॉरपीडो की खरीद शामिल है।
  • यह कदम रक्षा तैयारियों और स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देता है।

रक्षा अनुबंधों की प्रमुख विशेषताएं

1. सीक्यूबी कार्बाइन की खरीद

  • रक्षा मंत्रालय ने 4.25 लाख से अधिक क्लोज क्वार्टर बैटल कार्बाइन की आपूर्ति के लिए 2,770 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।
  • इन कार्बाइनों को भारतीय सेना और भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा।
  • ये ठेके भारत फोर्ज लिमिटेड और पीएलआर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को दिए गए थे।
  • ये हथियार कॉम्पैक्ट, हल्के और शहरी तथा निकटवर्ती युद्ध अभियानों के लिए उपयुक्त हैं।
  • ये वर्तमान में सैनिकों द्वारा उपयोग किए जा रहे पुराने छोटे हथियारों की जगह लेंगे।

2. हैवी वेट टॉरपीडो डील

  • WASS सबमरीन सिस्टम्स SRL के साथ ₹1,896 करोड़ का एक अलग अनुबंध भी हस्ताक्षरित किया गया।
  • इस सौदे में 48 हैवी वेट टॉरपीडो की खरीद शामिल है।
  • ये टॉरपीडो भारतीय नौसेना की प्रोजेक्ट-75 के तहत निर्मित कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियों के लिए हैं।
  • डिलीवरी अप्रैल 2028 में शुरू होगी और 2030 की शुरुआत तक पूरी हो जाएगी।
  • इन टॉरपीडो में उन्नत मार्गदर्शन और युद्ध प्रणाली लगी हुई है।

पृष्ठभूमि और रणनीतिक संदर्भ

  • भारत को लंबे समय से आधुनिक पैदल सेना के हथियारों और पनडुब्बी गोला-बारूद की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
  • अतीत में खरीद में हुई देरी ने युद्ध की तैयारियों को प्रभावित किया।
  • हाल के वर्षों में आपातकालीन और पूंजीगत खरीद मार्गों के तहत अनुमोदन प्रक्रिया में तेजी आई है।
  • कलवरी श्रेणी की पनडुब्बियां भारत के पारंपरिक पनडुब्बी बेड़े की रीढ़ की हड्डी हैं।
  • हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों के बीच उनकी हथियार प्रणालियों को उन्नत करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इस डील का महत्व

  • यह रक्षा समझौता कई कारणों से महत्वपूर्ण है।
  • यह जमीनी बलों की निकटवर्ती युद्ध क्षमता में सुधार करता है।
  • यह नौसेना की पानी के भीतर हमला करने की क्षमता को बढ़ाता है।
  • ये अनुबंध भारतीय कंपनियों को प्राथमिकता देकर आत्मनिर्भर भारत का समर्थन भी करते हैं।
  • घटक निर्माण और कच्चे माल की आपूर्ति के माध्यम से लघु एवं मध्यम उद्यमों को लाभ होगा।
  • इससे रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास होता है।

मुख्य डेटा का संक्षिप्त विवरण

पहलू विवरण/बिंदु
खबरों में क्यों? रक्षा मंत्रालय ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए प्रमुख रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए।
कुल अनुबंध मूल्य ₹4,666 करोड़
फोकस क्षेत्र पैदल सेना के हथियार और नौसैनिक जलमग्न युद्ध
प्रमुख खरीद CQB कार्बाइन और भारी वजन वाले टॉरपीडो
मुख्य लाभार्थी भारतीय सेना और भारतीय नौसेना
रणनीतिक उद्देश्य युद्ध की तैयारी और स्वदेशी रक्षा को बढ़ावा देना

प्रश्न-उत्तर

प्रश्न: रक्षा मंत्रालय के हालिया अनुबंध के तहत खरीदे गए भारी वजन वाले टॉरपीडो किन पनडुब्बियों के लिए हैं?

ए. अरिहंत वर्ग
बी. शिशुमार वर्ग
सी. कलवरी वर्ग
डी. चक्र वर्ग

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vaibhav

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