जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के 40वें स्थापना दिवस पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने “SUJVIKA” नामक एआई-आधारित बायोटेक उत्पाद डेटा पोर्टल का शुभारंभ किया। यह पोर्टल उद्योग भागीदार जैव प्रौद्योगिकी संचालित उद्यमों का संघ (ABLE) के सहयोग से विकसित किया गया है। कार्यक्रम का आयोजन नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित सिविल सेवा अधिकारी संस्थान (CSOI) में हुआ।
SUJVIKA एक ट्रेड स्टैटिस्टिक्स डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म है, जो बायोटेक उत्पादों के आयात से संबंधित संरचित और प्रमाणित डेटा उपलब्ध कराता है। यह पोर्टल बायोकेमिकल उत्पादों पर सेक्टर-वार जानकारी, औद्योगिक एंजाइम और अन्य बायोटेक आयात का डेटा, उच्च-मूल्य और उच्च-आयतन आयात का विश्लेषण, आयात निर्भरता का आकलन तथा स्वदेशीकरण और अनुसंधान एवं विकास (R&D) योजना को समर्थन प्रदान करता है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक–निजी भागीदारी के माध्यम से घरेलू बायोमैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना और साक्ष्य-आधारित नीतिनिर्माण को सुदृढ़ करना है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जैव-प्रौद्योगिकी अगली औद्योगिक क्रांति को गति देगी और “विकसित भारत 2047” के तहत 1 ट्रिलियन डॉलर की बायोइकोनॉमी का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2014 में 100 से कम बायोटेक स्टार्टअप थे, जो आज बढ़कर 11,000 से अधिक हो चुके हैं। इसी अवधि में भारत की बायोइकोनॉमी लगभग 10 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 165.7 अरब डॉलर तक पहुँच गई है। भारत आज वैश्विक स्तर पर अग्रणी बायोटेक गंतव्यों और वैक्सीन निर्माताओं में शामिल है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत BioE3 नीति (Biotechnology for Economy, Environment and Employment) के कार्यान्वयन में जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) और जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और नवाचार परिषद (BRIC) अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। इसके अतिरिक्त नेशनल बायोफाउंड्री नेटवर्क (6 बायोफाउंड्री और 21 बायो-एनएबलर सुविधाएँ), 21 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 95 बायो-इनक्यूबेटर तथा ₹1 लाख करोड़ के RDI पहल के अंतर्गत ₹2,000 करोड़ का राष्ट्रीय आह्वान जैसी पहलें भी इस क्षेत्र को मजबूती दे रही हैं।
जीनोमइंडिया परियोजना के अंतर्गत 99 आबादियों के 10,000 व्यक्तियों के जीनोम अनुक्रमण का डेटा भारतीय जैविक डेटा केंद्र के माध्यम से उपलब्ध कराया गया है। इसके अलावा, सीवियर हीमोफीलिया A के लिए भारत का पहला मानव जीन थेरेपी परीक्षण सफल रहा, जिसमें फैक्टर VIII का स्थायी उत्पादन दर्ज किया गया।
अंतरिक्ष जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और DBT के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत अंतरिक्ष मिशनों में बायोटेक प्रयोगों को भी बढ़ावा दिया गया है।
मंत्री ने DBT की नई वेबसाइट का भी शुभारंभ किया, जिसे डिजिटल ब्रांड आइडेंटिटी मैनुअल (DBIM) के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे मानकीकृत डिजिटल शासन को बढ़ावा मिलेगा।
DBT का 40वाँ स्थापना दिवस वर्ष 1986 से अब तक की यात्रा को दर्शाता है— जहाँ विभाग ने क्षमता निर्माण से शुरुआत कर आज नवाचार, उद्यमिता और बायोइकोनॉमिक विकास के प्रमुख प्रेरक के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है। “SUJVIKA” का शुभारंभ भारत के बायोटेक इकोसिस्टम को एआई-सक्षम डेटा इंटेलिजेंस और रणनीतिक योजना के माध्यम से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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