पश्चिम गोदावरी (आंध्र प्रदेश) के पालकोल्लु की रहने वाली डांगेटी जाह्नवी ने भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में अपना नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कर लिया है। वे नासा के प्रतिष्ठित “इंटरनेशनल एयर एंड स्पेस प्रोग्राम” को सफलतापूर्वक पूरा करने वाली पहली भारतीय बन गई हैं। यह उपलब्धि भारत की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष अभियानों में भागीदारी और एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी में बढ़ती क्षमताओं का प्रतीक है।
जाह्नवी की यह सफलता STEM (विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी प्रतीक है। नासा के कड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम में उनकी सफलता भारत की प्रतिभा को वैश्विक स्तर पर स्थापित करती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए नए रास्ते खोलती है।
जाह्नवी को “टाइटन ऑर्बिटल पोर्ट स्पेस स्टेशन” पर भेजे जाने के लिए चुना गया है, जो अमेरिका द्वारा बनाया जा रहा एक नवीनतम व्यावसायिक अंतरिक्ष स्टेशन है और अगले चार वर्षों में शुरू होने की संभावना है। उनका यह 2029 का मिशन उन्हें ऐसे पहले भारतीयों में शामिल करेगा जो किसी व्यावसायिक स्पेस स्टेशन के संचालन में भाग लेंगे। यह भारत की वैश्विक अंतरिक्ष साझेदारी में महत्वपूर्ण भूमिका का संकेत है।
जाह्नवी ने इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में स्नातक की पढ़ाई पंजाब के लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से पूरी की। इससे पहले उन्होंने पालकोल्लु में इंटरमीडिएट स्तर की शिक्षा प्राप्त की।
उनके माता-पिता श्रीनिवास और पद्मश्री वर्तमान में कुवैत में कार्यरत हैं और वहां से अपनी बेटी के सपनों में सहयोग कर रहे हैं। यह परिवारिक समर्थन वैश्विक करियर की सच्चाई और बलिदान को दर्शाता है।
निजी उपलब्धियों से परे जाह्नवी एक प्रेरक STEM शिक्षा कार्यकर्ता भी हैं। उन्होंने ISRO के शैक्षिक कार्यक्रमों में भाषण दिए और देशभर में छात्रों को प्रेरित किया है। वे राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (NITs) में भी युवाओं को अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में मार्गदर्शन देती हैं।
उनका अंतरिक्ष प्रशिक्षण अत्यधिक विविध और कठोर है। वे एनालॉग मिशनों में भाग लेती हैं जो पृथ्वी पर अंतरिक्ष जैसी परिस्थितियों का अनुकरण करते हैं।
वह डीप सी डाइविंग (गहरे समुद्र में गोताखोरी) करती हैं, जो चरम परिस्थितियों और जीवन समर्थन प्रणालियों को समझने में मदद करती है — ये कौशल अंतरिक्ष में बेहद उपयोगी होते हैं।
इसके अतिरिक्त, वे ग्रह विज्ञान और दीर्घकालिक अंतरिक्ष यात्रा की स्थिरता से संबंधित वैश्विक सम्मेलनों में भाग लेती हैं और दुनिया के अग्रणी वैज्ञानिकों से संवाद करती हैं।
जाह्नवी ने International Astronomical Search Collaboration (IASC) के साथ काम करते हुए Pan-STARRS टेलीस्कोप डाटा के आधार पर एक क्षुद्रग्रह की खोज की। यह खोज उनके वैज्ञानिक विश्लेषण कौशल और शोध-समर्पण को दर्शाती है।
जाह्नवी को Space Iceland के जियोलॉजिकल प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए चुना गया, जिसमें उन्होंने ज्वालामुखीय और ग्रह-समरूप भू-प्रक्रियाओं का अध्ययन किया। वे इस कार्यक्रम में भाग लेने वाली सबसे युवा विदेशी एनालॉग अंतरिक्ष यात्री और पहली भारतीय हैं।
जाह्नवी को उनके कार्यों के लिए कई सम्मान मिले हैं:
नासा स्पेस ऐप्स चैलेंज में पीपल्स चॉइस अवॉर्ड
इसरो के विश्व अंतरिक्ष सप्ताह समारोह में यंग अचीवर्स अवॉर्ड
ये पुरस्कार उनकी रचनात्मकता, वैज्ञानिक समझ और जनप्रियता को दर्शाते हैं। वे आज के युवाओं के लिए एक प्रेरणास्त्रोत और रोल मॉडल बन चुकी हैं।
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