चीन द्वारा दुर्लभ मृदा निर्यात पर प्रतिबंध

चीन ने सात दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (Rare Earth Elements – REEs) के निर्यात पर नए प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे पहले से ही अस्थिर वैश्विक व्यापार माहौल में तनाव और बढ़ गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया जब अमेरिका ने अपने प्रमुख व्यापारिक भागीदारों पर नए शुल्क लगाए हैं।चीन लंबे समय से दुर्लभ पृथ्वी खनन और परिशोधन में वैश्विक स्तर पर अग्रणी रहा है, और ये तत्व इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों और सैन्य तकनीकों के निर्माण में बेहद आवश्यक हैं। इन प्रतिबंधों के चलते वैश्विक उद्योगों पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दुनिया के विभिन्न देशों को अब अपने आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और चीनी निर्यात पर निर्भरता कम करने की दिशा में तेजी से काम करने की जरूरत है।

मुख्य बिंदु

प्रतिबंधित 7 मुख्य REEs:

  1. सैमेरियम (Sm)

  2. गैडोलिनियम (Gd)

  3. टर्बियम (Tb)

  4. डिस्प्रोसियम (Dy)

  5. ल्यूटेथियम (Lu)

  6. स्कैन्डियम (Sc)

  7. इट्रियम (Y)

प्रतिबंध का कारण:

  • राष्ट्रीय सुरक्षा

  • अंतरराष्ट्रीय दायित्व

  • अप्रसार (non-proliferation) से जुड़ी चिंताएँ

क्या होते हैं REEs (Rare Earth Elements)?

  • 17 धात्विक तत्वों का समूह जिनके रासायनिक गुण एक जैसे होते हैं और इनका रंग चांदी जैसा होता है।

  • इसमें 15 लैंथेनाइड्स, स्कैन्डियम और इट्रियम शामिल होते हैं।

उदाहरण:

  • नियोडिमियम (Nd), सैमेरियम (Sm), गैडोलिनियम (Gd), डिस्प्रोसियम (Dy), इट्रियम (Y), टर्बियम (Tb), ल्यूटेथियम (Lu) आदि।

गुणधर्म:

  • उच्च चुंबकीय और ऑप्टिकल गुण

  • उपयोग:

    • इलेक्ट्रिक वाहनों और पवन टर्बाइनों के मैग्नेट

    • डिजिटल डिस्प्ले, रक्षा प्रणालियाँ, स्मार्टफोन, लेजर आदि

REEs क्यों महत्वपूर्ण हैं?

प्रमुख उपयोग:

  • रक्षा तकनीक: जेट, मिसाइल, रडार

  • हरित ऊर्जा: EVs, सौर पैनल, पवन टरबाइन

  • उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स: मोबाइल, लैपटॉप

  • फ़ॉस्फर, चमकदार पदार्थ, मैग्नेट और बैटरी मिश्रधातुओं में उपयोग

चीन की भूमिका:

  • वैश्विक REE आपूर्ति का 85–95% हिस्सा अकेले चीन से

  • सिर्फ खनन नहीं, परिशोधन (refining) और प्रसंस्करण (processing) में भी अग्रणी

  • प्रमुख भंडार: जियांग्शी, गुआंगडोंग, हुबेई, सिचुआन, इनर मंगोलिया

  • 1990 के दशक से चीन इन्हें “रणनीतिक खनिज” घोषित कर चुका है।

पिछले कदम:

  • 2010: जापान से विवाद के दौरान निर्यात रोक दिया गया

  • 2022: अमेरिका से ट्रेड वॉर के दौरान निर्यात रोकने की धमकी

वैश्विक प्रभाव:

  • कीमतों में वृद्धि:

    • जैसे, डिस्प्रोसियम की कीमत $230 से $300 प्रति किलो तक जा सकती है

  • आपूर्ति श्रृंखला में बाधा:

    • ऑफशोर विंड टर्बाइन

    • इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन

    • एयरोस्पेस और तकनीकी उद्योग

  • कुछ देशों के पास भंडारण है, जिससे अल्पकालिक राहत मिल सकती है

  • लेकिन दीर्घकालिक निर्भरता अब भी अधिक बनी हुई है

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

दुनिया का सबसे जहरीला बिच्छू कौन सा है?, जानें कहाँ पाए जाते हैं सबसे ज्यादा बिच्छू

धरती पर मौजूद सबसे डरावने जीवों में बिच्छू (Scorpion) का नाम जरूर लिया जाता है।…

3 weeks ago

भारत में कहाँ है एशियाई शेरों का असली घर? दुनिया की इकलौती जगह जहाँ जंगल में आज़ादी से घूमते हैं Asiatic Lions

शेरों का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में अफ्रीका के विशाल जंगलों की तस्वीर…

4 weeks ago

भारत का कौन-सा राज्य कहलाता है “Spice Garden of India”? जिसके मसालें दुनिया-भर में है मशहूर

भारत अपने मसालों के लिए सदियों से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। भारतीय मसालों…

4 weeks ago

भारत का सबसे अमीर गांव कौन-सा है? यहां हर घर में करोड़ों की संपत्ति, बैंक में जमा हैं हजारों करोड़

भारत गांवों का देश कहा जाता है। यहां लाखों गांव हैं, जिनमें से कई आज…

4 weeks ago

क्या आप जानते हैं भारत का Tea Capital कौन-सा राज्य है? यहां उगती है सबसे ज्यादा चाय

रेलवे स्टेशन हो, ऑफिस हो या गांव की चौपाल — चाय हर जगह लोगों की…

4 weeks ago

भारत का कौन-सा शहर कहलाता है “Mini India”? जानिए क्यों मिली यह खास पहचान

भारत अपनी विविधता, संस्कृति, भाषाओं और परंपराओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।…

4 weeks ago