चीन ने आधिकारिक रूप से दक्षिण चीन सागर में एक गहरे समुद्री अनुसंधान केंद्र के निर्माण को मंजूरी दे दी है, जिसे “डीप-सी स्पेस स्टेशन” कहा जा रहा है। यह केंद्र समुद्र की सतह से 2,000 मीटर (6,560 फीट) की गहराई में स्थित होगा और समुद्री अन्वेषण को बढ़ावा देने के साथ-साथ क्षेत्र में चीन की भू-राजनीतिक उपस्थिति को मजबूत करेगा। यह स्टेशन 2030 तक संचालित होने की उम्मीद है और इसमें छह वैज्ञानिक एक महीने तक के मिशन पर रह सकेंगे, जिससे चरम समुद्री परिस्थितियों में रीयल-टाइम प्रयोग किए जा सकेंगे।
| सारांश/स्थिर जानकारी | विवरण |
| क्यों चर्चा में? | चीन दक्षिण चीन सागर में पहली गहरे समुद्री ‘स्पेस स्टेशन’ बनाने जा रहा है |
| परियोजना का नाम | दक्षिण चीन सागर में डीप-सी ‘स्पेस स्टेशन’ |
| मंजूरी की तिथि | फरवरी 2025 |
| गहराई | 2,000 मीटर (6,560 फीट) |
| संचालन वर्ष | 2030 तक |
| क्षमता | 6 वैज्ञानिक, एक बार में एक माह तक रह सकेंगे |
| अनुसंधान क्षेत्र | कोल्ड सीप इकोसिस्टम, मेथेन प्रवाह, जैव विविधता, टेक्टोनिक गतिविधि |
| तकनीकी विशेषताएं | दीर्घकालिक जीवन समर्थन प्रणाली, एआई-समेकित निगरानी, समुद्री तल फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क |
| आर्थिक संभावनाएं | 70 अरब टन मेथेन हाइड्रेट्स, समृद्ध खनिज भंडार |
| भू-राजनीतिक प्रभाव | दक्षिण चीन सागर में चीन के क्षेत्रीय दावों को मजबूत करेगा |
| मानव बनाम एआई | गहरे समुद्री अनुसंधान और त्वरित निर्णय लेने में मानव भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी |
| संभावित ऊर्जा स्रोत | परमाणु ऊर्जा से संचालित होने की संभावना, जैसे अमेरिका और रूस के पूर्व डीप-सी स्टेशन |
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