मुंबई में कार्नेक पुल का नाम ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर रखा गया

दक्षिण मुंबई में पुनर्निर्मित कार्नेक रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) का नाम बदलकर ‘सिंदूर ब्रिज’ कर दिया गया है। यह नाम पहलगाम आतंकवादी हमले का बदला लेने के लिए मई में पाकिस्तान के खिलाफ भारत की सैन्य कार्रवाई से प्रेरित है। पूर्व को पश्चिम से जोड़ने वाले पुल को पहले कार्नेक ब्रिज के नाम से जाना जाता था। नाम बदलने का उद्देश्य ब्रिटिश गवर्नर जेम्स रिवेट-कार्नाक की औपनिवेशिक विरासत को हटाना भी है, जिन्होंने उत्पीड़न के समय में शासन किया था।

पुल का नामकरण और उद्घाटन

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 10 जुलाई 2025 को नव-निर्मित सिंदूर पुल का उद्घाटन किया। पहले यह पुल कार्नेक ब्रिज के नाम से जाना जाता था, जिसका नाम अब ऑपरेशन सिंदूर की वीरता के सम्मान में बदल दिया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य ब्रिटिश शासन के उस दौर की यादों को मिटाना है, जब गवर्नर कार्नेक जैसे अधिकारी भारतीयों पर दमन करते थे।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि यह नामकरण औपनिवेशिक प्रतीकों को हटाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने प्रबोधनकार ठाकरे के लेखनों का उल्लेख करते हुए बताया कि किस तरह कर्नैक ने सातारा के छत्रपति प्रताप सिंह राजे और रंगो बापूजी के खिलाफ षड्यंत्र रचा था।

पुल निर्माण की जानकारी और देरी का कारण

328 मीटर लंबा यह पुल चार लेन का है और यह क्रॉफर्ड मार्केट, कालबादेवी और धोबी तालाओ जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में यातायात को आसान बनाएगा। पुराना दो लेन वाला कार्नेक ब्रिज 1868 में बना था, जिसे 2022 में संरचनात्मक ऑडिट में असुरक्षित पाए जाने के बाद गिरा दिया गया था।

निर्माण कार्य 13 जून 2025 को पूरा हो गया था, लेकिन संकेतक बोर्ड, रेलवे की एनओसी जैसी औपचारिकताओं के कारण उद्घाटन में देरी हुई। 2 जुलाई को उद्धव ठाकरे गुट और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने इस देरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया था।

इतिहास और नाम बदलने की पृष्ठभूमि

पुराने पुल का नाम जेम्स रिवेट-कार्नेक, बॉम्बे के गवर्नर (1839–1841) के नाम पर रखा गया था। वह उन औपनिवेशिक प्रशासकों में से एक थे जिनके नाम अब भी भारत के कई सार्वजनिक ढांचों पर हैं। नया नाम ‘सिंदूर’, भारत की सैन्य शक्ति और वर्तमान गौरव का प्रतीक है। सीएम फडणवीस ने कहा कि “सिंदूर” शब्द सिर्फ सैन्य विजय का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह इतिहास के उन काले अध्यायों को मिटाने का प्रतीक भी है, जिन्हें ब्रिटिश राज में लिखा गया था।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

G7 Summit 2026: फ्रांस में दुनिया के 7 सबसे ताकतवर देशों की बैठक, जानिए 13 बड़े फैसले और भारत के लिए क्यों है खास

दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कई बड़े फैसलों का मंच माने जाने…

1 month ago

दुनिया का सबसे जहरीला बिच्छू कौन सा है?, जानें कहाँ पाए जाते हैं सबसे ज्यादा बिच्छू

धरती पर मौजूद सबसे डरावने जीवों में बिच्छू (Scorpion) का नाम जरूर लिया जाता है।…

2 months ago

भारत में कहाँ है एशियाई शेरों का असली घर? दुनिया की इकलौती जगह जहाँ जंगल में आज़ादी से घूमते हैं Asiatic Lions

शेरों का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में अफ्रीका के विशाल जंगलों की तस्वीर…

2 months ago

भारत का कौन-सा राज्य कहलाता है “Spice Garden of India”? जिसके मसालें दुनिया-भर में है मशहूर

भारत अपने मसालों के लिए सदियों से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। भारतीय मसालों…

2 months ago

भारत का सबसे अमीर गांव कौन-सा है? यहां हर घर में करोड़ों की संपत्ति, बैंक में जमा हैं हजारों करोड़

भारत गांवों का देश कहा जाता है। यहां लाखों गांव हैं, जिनमें से कई आज…

2 months ago

क्या आप जानते हैं भारत का Tea Capital कौन-सा राज्य है? यहां उगती है सबसे ज्यादा चाय

रेलवे स्टेशन हो, ऑफिस हो या गांव की चौपाल — चाय हर जगह लोगों की…

2 months ago