लंबे समय से कंबोडिया के प्रधानमंत्री पद पर बने हुए हुन सेन ने कहा कि वह तीन सप्ताह में प्रधानमंत्री पद छोड़ देंगे और अपने सबसे बड़े बेटे को पद सौंप देंगे। हाल ही में हुए चुनाव में पीएम हुन सेन के बड़े बेटे ने संसद में पहली बार जीत दर्ज की है। हुन सेन ने कहा कि राष्ट्रीय चुनाव आयोग द्वारा हुए चुनाव के अंतिम नतीजों की रिपोर्ट आने के बाद उनके बेटे को प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किया जाएगा। चुनाव में कम्बोडियन पीपुल्स पार्टी (सीपीपी) ने 125 में से 120 सीटें जीती हैं।
यह घोषणा हुन सेन की कम्बोडियन पीपुल्स पार्टी (Cambodian People’s Party) द्वारा सप्ताहांत के चुनावों में भारी जीत हासिल करने के बाद की गई है। हालांकि, पश्चिमी देशों और अधिकार संगठनों ने चुनाव की ‘न तो स्वतंत्र और न ही निष्पक्ष’ कहकर आलोचना की और कहा कि चुनाव में देश के मुख्य विपक्ष को दबा दिया गया। हुन सेन 38 वर्षों से कंबोडिया के निरंकुश नेता रहे हैं, लेकिन चुनाव से पहले उन्होंने कहा था कि वह अगले पांच साल के कार्यकाल के दौरान अपने सबसे बड़े बेटे हुन मानेट (Hun Manet) को यह पद सौंप देंगे।
45 साल के हुन मैनेट फिलहाल देश की सेना के प्रमुख हैं। एशिया में सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले नेता हुन सेन ने एक टेलीविजन संबोधन में में कहा कि उन्होंने राजा नोरोडोम सिहामोनी (Norodom Sihamoni) को अपने फैसले के बारे में सूचित कर दिया था और राजा एक औपचारिकता के तहत सहमत हो गए थे।
हुन सेन वियतनाम छोड़ने से पहले 1970 के दशक में नरसंहार के लिए जिम्मेदार कट्टरपंथी कम्युनिस्ट खमेर रूज में एक मध्य-रैंकिंग कमांडर थे। जब वियतनाम ने 1979 में खमेर रूज को सत्ता से बेदखल कर दिया, तो वह जल्द ही हनोई द्वारा स्थापित नई कंबोडियाई सरकार के वरिष्ठ सदस्य बन गए। हुन सेन ने नाममात्र के लोकतांत्रिक ढांचे में एक निरंकुश रूप में सत्ता बनाए रखी। हुन मानेट अमेरिकी सैन्य अकादमी वेस्ट प्वाइंट से स्नातक हैं और उन्होंने न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री और ब्रिटेन में ब्रिस्टल विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है।
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