बेहतर निगरानी के लिए CAG एआई-आधारित ऑडिट प्रणाली शुरू करेगा

भारत के महालेखा परीक्षक (CAG) अब सार्वजनिक लेखा परीक्षा प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए एक एआई-संचालित लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) लॉन्च करने जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य सरकारी लेन-देन की विशाल और जटिल प्रकृति में दक्षता, एकरूपता और जोखिम पहचान को और बेहतर बनाना है।

भारत के संवैधानिक लेखा परीक्षक के रूप में, CAG वित्तीय जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाता है। सार्वजनिक रिकॉर्ड के बढ़ते डिजिटलीकरण के साथ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को लेखा परीक्षा में शामिल करना एक नया युग है, जो दिखाता है कि निगरानी संस्थान डिजिटल दौर में कैसे अनुकूलित हो रहे हैं।

डिजिटल ऑडिट सिस्टम की ज़रूरत क्यों है

पारंपरिक लेखा परीक्षा में क्षेत्रीय दौरे, रिकॉर्ड की मैनुअल जांच और लंबा दस्तावेज़ीकरण शामिल होता है। लेकिन आज सरकारी लेन-देन से उत्पन्न होने वाला विशाल डिजिटल डेटा, स्वचालित टूल्स की अनुपस्थिति में काफी हद तक अनुपयोगी रह जाता है।

एआई एकीकरण के प्रमुख कारण

  • विभिन्न सरकारी विभागों में डेटा का तेजी से बढ़ना।

  • सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन की बढ़ती जटिलता।

  • लागत-प्रभावी लेखा परीक्षा की ज़रूरत (रिमोट और हाइब्रिड तरीकों से)।

  • मैनुअल निरीक्षण के बजाय तेज़ और जोखिम-संवेदनशील आकलन की मांग।

यह बदलाव डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस जैसे ढाँचों के तहत शासन में तकनीकी रूपांतरण के व्यापक लक्ष्य से जुड़ा हुआ है।

लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) क्या है?

लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) कृत्रिम बुद्धिमत्ता का एक स्वरूप है, जो डीप लर्निंग की मदद से भाषा-आधारित सामग्री को समझता, उत्पन्न करता और सारांशित करता है।

इसकी प्रमुख क्षमताएँ:

  • विशाल डेटासेट में पैटर्न पहचानना।

  • दस्तावेज़ों का सार प्रस्तुत करना।

  • संभावित परिणामों की भविष्यवाणी करना।

  • पहले से उपलब्ध उदाहरणों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करना।

ऐसे मॉडल लाखों दस्तावेज़ों पर प्रशिक्षित होते हैं, जिससे वे प्रसंग को समझने और निर्णय-निर्माण में सुधार करने में सक्षम होते हैं, विशेषकर सार्वजनिक लेखा परीक्षा जैसे क्षेत्रों में।

शासन पर व्यापक प्रभाव

यह सुधार केवल तकनीकी उन्नयन नहीं है, बल्कि यह डेटा-आधारित शासन और रियल-टाइम जवाबदेही की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह अन्य क्षेत्रों में भी नवाचार को प्रेरित कर सकता है, जैसे:

  • मंत्रालयों के आंतरिक ऑडिट

  • नियामकीय अनुपालन (regulatory compliance) ऑडिट

  • स्थानीय निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के ऑडिट

साथ ही यह वैश्विक रुझानों के अनुरूप है, जहाँ कई देशों की सुप्रीम ऑडिट संस्थाएँ (SAIs) सार्वजनिक खर्च, खरीद और धोखाधड़ी जोखिम की निगरानी के लिए एआई आधारित टूल अपना रही हैं।

स्थिर तथ्य

  • संस्था: भारत के महालेखा परीक्षक (CAG)

  • प्रौद्योगिकी: एआई-संचालित लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM)

  • उद्देश्य: सार्वजनिक लेखा परीक्षा में दक्षता, एकरूपता और जोखिम पहचान बढ़ाना

  • लाभ: तेज़ ऑडिट, बेहतर विसंगति पहचान, व्यापक कवरेज, क्षेत्रीय निर्भरता में कमी

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vikash

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